कोटा/महारानी अवंती बाई लोधी, मंडला, (मध्यप्रदेश) का जन्म दिवस रविवार को कोटा में धूम धाम से मनाया गया । समाज के प्रतिष्ठित लोगों की उपस्थिति और हर्षोल्लास ने उसको बहुत यादगार बना दिया । महारानी का अवतरण 16 अगस्त 1831 को मनकेडी नामक गांव में, राव जुझार सिंह के घर में हुआ था । वह बचपन से ही तीर तलवार चलाने में कुशलता प्राप्त कर चुकी थी । कहा जाता है, युद्ध कला के पारंगत गुरु अवंती बाई को इस युद्धकला की शिक्षा देने उनके निवास पर सहर्ष आया करते थे । थोड़े ही समय में वह तीर, तलवार चलाने एवं घुड़सवारी में पूर्ण निपुण हो गई । अब, वह अंग्रेजों से उनकी कुनीतियों के विरुद्ध लड़ने में पूर्ण समर्थ थी । जब उनका राज्य कोर्ट्स ऑफ वॉर्ड्स घोषित कर दिया गया, तब यह रानी को मंजूर न था । वह अपना स्वतंत्र राज्य चाहती थी, अतः उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध युद्ध का ऐलान कर दिया ।
महारानी अवंतीबाई बड़ी वीरता से लड़ी परंतु सेना अत्यधिक छोटी होने के कारण, वह सफलता न पा सकी । अंत में स्वयं को घिरता देख अपनी ही कतार से अपना सिर धड़ से अलग कर लिया । 20 मार्च 1831 उनके जीवन का अंतिम दिन था । ऐसी थी महारानी अवंती बाई लोधी , मंडला मध्य प्रदेश । उनका नाम स्वर्णाक्षरों में सदैव अमर रहेगा ।
इस अवसर पर श्री महावीर सिंह राजपूत, के. सी. राजपूत, श्री वाई पी सिंह लोधी, श्री कुलदीप सिंह लोधी, श्री डोरी लाल लोधी, प्रदीप सिंह लोधी, देवेश लोधी,एवं शहर के अन्य गणमान्य नागरिकों ने अपने विचार व्यक्त किए और उन्हें इतिहास की एक महान क्षत्राणी कह कर पुकारा गया और वास्तव में वह निडर महिला के रूप में एक शेरनी ही थी। सभी ने उन्हें फूल माला पहना कर अपनी श्रृद्धांजले देकर उन्हें एक लोधी महारानी एवं एक महान महारानी के रूप में याद किया गया। समाज के लोगों ने बताया कि महारानी सदैव उनके दिलों में सम्मान सहित उपस्थित रहेंगी। भावी पीढ़ियां उनके जीवन से सदैव प्रेरणा लेती रहेंगी।






