मौसम है आनंदभरा…
मौसम कितना आनंदमय है ।
यहां किसी को कोई न भय है ।।
सबका यहां मस्त है जीवन ।
हर वस्तु है यहां संजीवन ।।
पशु को नर से कभी न डर है ।
सब माने हैं अपना घर है ।।
आपस में सब मिलकर रहते ।
नर किसी को तंग नहिं करते ।।
पशु मानव तो सभी जीव हैं।
जीवन है तो सभी सजीव हैं ।।
अपना ही किरदार निभाते ।
खूब सभी आपस में भाते ।।
कुदरत का भी यही संदेश ।
किसी को कभी न देना क्लेश ।।
मिलकर रहो आता आनंद ।
फिर जीवन भी रहता सानंद ।।
काली चरन राजपूत, कोटा।
मौसम है आनंदभरा…- कालीचरण राजपूत





