-फादर्स डे पर विशेष–
*पापा जी ओ पापा जी*
कुछ मेरी भी सुनलो पापा।
मन की बात बताओ पापा।।
दूर बसे क्यों हमसे जाकर।
इतना सा समझाओ पापा।।
छोटी-छोटी घर की बातें ।
घर में ही सुलझाओ पापा।।
मेरी बहिना रोज़ पूछती।
कहाँ गए बतलाओ पापा।।
आना-जाना भी पड़ता है।
पास हमारे आओ पापा।।
इतना तो कर ही सकते हो।
हमको पास बुलाओ पापा।।
रो-रोकर अब हाल बुरा है।
गई रोशनी लाओ पापा।।
सच कहते हैं “सोनगरा जी।
हर ग़म दूर भगाओ पापा।।
*कवि गौरीशंकर सोनगरा*
मौलिक स्वरचित रचना
फादर्स डे पर विशेष-कवि गौरीशंकर सोनगरा






