Monday, April 20, 2026
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कोटा का प्राचीन आलनिया माता मंदिर का इतिहास -नवरात्रि विशेष

झालावार रोड (राष्ट्रीय राजमार्ग 12) स्थित आलनिया माता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है, इस मंदिर पर दूर -दराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, नाहरसिगी माता व कालिका माता की अति प्राचीन मूर्तियां है, जो करीब 450 से भी ज्यादा वर्ष पुरानी बताई जाती है, राष्ट्रीय राजमार्ग पर होने से मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालक देवी की शरण में जाकर शीश अवश्य नवाते हैं, श्रद्धालुओं का मानना है की देवी अपने दरबार में आने वाले भक्त की पुकार सुनती है, मंदिर परिसर में नाहरसिगी व कलिका  माता की प्रतिमा स्थापित है, लोग मंदिर को पूर्व में बेर वाली माता के नाम से जानते थे, बूंदी जिले में स्थित मेनाल से कुछ साधु संत प्रतिमाओं को यहां लाए थे, साधुओं ने इन प्रतिमाओं को घने जंगल में एक बेर के पेड़ के नीचे स्थापित किया था तब कम ही श्रद्धालु यहां पूजा अर्चना करते थे, लेकिन क्षेत्र से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी, लोगों ने प्रतिमाओं को एक चबूतरे पर स्थापित कर दिया, वर्ष 2004 में आलनिया माता मंदिर चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की गई, इसके बाद मंदिर का विकास होता चला गया, क्षेत्र भव्य रूप लिए हुए हैं, अब यहां आकर्षक सिंह द्वारा है मंदिर के पुजारी रूपचंद सुमन के अनुसार उनका परिवार वर्षों से देवी का पूजन कर रहा है

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