Saturday, April 18, 2026
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वैज्ञानिकों ने क्वांटम पदार्थों में टोपोलॉजिकल इनवेरिएंट नामक टोपोलॉजिकल स्पेस के गुण को खोजने का एक नया तरीका खोज निकाला

 

वैज्ञानिकों ने क्वांटम पदार्थों में टोपोलॉजिकल इनवेरिएंट नामक टोपोलॉजिकल स्पेस के गुण को खोजने का एक नया तरीका खोज निकाला है,जो निरंतर विरूपण या परिवर्तन के तहत अपरिवर्तित रहता है।

टोपोलॉजिकल सामग्री अगली पीढ़ी की तकनीक क्वांटम कंप्यूटिंग, त्रुटि सहनशील इलेक्ट्रॉनिक्स प्रणाली और ऊर्जा-कुशल प्रणालियों में सबसे आगे हैं। लेकिन उनके अनोखे गुणों का पता लगाना हमेशा मुश्किल रहा है। टोपोलॉजिकल इनवेरिएंस का अर्थ है कि अगर आप बिना काटे या चिपकाए एक आकृति को दूसरे में बदल सकते हैं, तो कोई भी टोपोलॉजिकल इनवेरिएंस दोनों आकृतियों के लिए समान होगा। एक लोकप्रिय सादृश्य वड़ा (या डोनट) और एक कॉफी कप है। चूँकि वड़ा और कॉफी कप दोनों में एक छेद होता है, इसलिए वे टोपोलॉजिकल रूप से बराबर हैं। दूसरी ओर, वड़ा और इडली बराबर नहीं हैं, क्योंकि आप लगातार एक को दूसरे में नहीं बदल सकते क्योंकि उनमें छिद्रों की संख्या अलग-अलग होती है। छिद्रों की गिनती का यह विचार अनोखे पदार्थों के छिपे हुए गुणों को समझने की कुंजी है।

टोपोलॉजिकल इंसुलेटर और सुपरकंडक्टर जैसी कुछ सामग्रियां अजीब तरीके से व्यवहार करती हैं। क्वांटम स्तर पर सामग्री के “आकार” के आधार पर इलेक्ट्रॉन अलग-अलग व्यवहार करते हैं। इन आकृतियों को उनकी उपस्थिति से नहीं, बल्कि कुछ गहरे-टोपोलॉजिकल इनवेरिएंट्स द्वारा परिभाषित किया जाता है, जैसे वाइंडिंग नंबर (1डी सिस्टम में) और चेर्न नंबर (2डी सिस्टम में)। ये संख्याएं छिपे हुए कोड की तरह होती हैं जो यह निर्धारित करती हैं कि कण किसी सामग्री के माध्यम से कैसे चलते हैं।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक टीम ने स्पेक्ट्रल फ़ंक्शन नामक एक गुण का उपयोग करके इस छिपे हुए कोड का पता लगाने का एक नया तरीका खोजा है। यह क्वांटम फ़िंगरप्रिंट जैसा है जो पदार्थ के अंदर ऊर्जा और कण के व्यवहार के बारे में जानकारी देता हैं। प्रोफेसर दिव्येंदु रॉय और पीएचडी शोधकर्ता किरण बाबासाहेब एस्टेक ने मोमेंटम-स्पेस स्पेक्ट्रल फ़ंक्शन (एसपीएसएफ) का विश्लेषण करके इसे अंजाम दिया है।

परंपरागत रूप से, वैज्ञानिक इलेक्ट्रॉन व्यवहार का अध्ययन करने के लिए एआरपीईएस (एंगल-रिजॉल्व्ड फोटोएमिशन स्पेक्ट्रोस्कोपी) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते थे। फिजिकल रिव्यू बी में प्रकाशित नए शोध से पता चला है कि वही स्पेक्ट्रल फ़ंक्शन पदार्थ की छिपी हुई टोपोलॉजी के बारे में जानकारी प्रदान करता है जो संरचना का प्रत्यक्ष अवलोकन किए बिना “देखने” का एक क्रांतिकारी तरीका हैं।

आरआरआई में सैद्धांतिक भौतिकी में पीएचडी छात्र और मुख्य लेखक किरण बाबासाहेब एस्टेक ने कहा, “स्पेक्ट्रल फ़ंक्शन का उपयोग कई वर्षों से एआरपीईएस प्रणाली के माध्यम से अवस्था घनत्व और इलेक्ट्रॉनों के फैलाव संबंधी जैसी भौतिक मात्राओं की जांच करने के लिए एक प्रयोगात्मक उपकरण के रूप में किया जाता रहा है। इसे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के टोपोलॉजी या टोपोलॉजिकल पहलुओं की जांच करने के लिए एक उपकरण के रूप में नहीं देखा गया था।”

उन्होंने कहा, “हमने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से प्रदर्शित किया है कि स्पेक्ट्रल फंक्शन में किसी प्रणाली की टोपोलॉजी के बारे में भी संकेत निहित होते हैं।”

यह अध्ययन सम्भवतः टोपोलॉजिकल सामग्रियों के अन्वेषण और वर्गीकरण के लिए एक सार्वभौमिक उपकरण प्रदान करता है, जो संघनित पदार्थ भौतिकी में नई खोजों का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। यह क्वांटम कंप्यूटरों, अगली पीढ़ी की इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए उपयोगी होने के साथ-साथ ऊर्जा दक्षता में भी सहायक हो सकता है।

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