के डी अब्बासी
कोटा, 26 मई। — कोचिंग हब कोटा से एक और दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां एक कोचिंग छात्र ने आत्महत्या कर ली। यह मामला आत्महत्या की उस बढ़ती श्रृंखला का हिस्सा बन गया है, इस साल अब तक एक दर्जन से अधिक छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। जिसने देशभर में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।इस घटना पर नगर निगम की पार्षद सलीना शेरी ने न सिर्फ गहरा दुख व्यक्त किया, बल्कि कोचिंग संस्थानों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकांश कोचिंग संस्थान केवल फीस वसूली और परिणामों पर ध्यान देते हैं, लेकिन छात्रों की मानसिक स्थिति और भावनात्मक जरूरतों की पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है।सलीना शेरी ने कहा, “हर बार एक छात्र की जान जाती है और हम केवल अफसोस जताते हैं। न कोई कोचिंग संस्थान जिम्मेदारी लेता है, न प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करता है। यह लापरवाही नहीं, एक आपराधिक चुप्पी है।”उन्होंने जिला प्रशासन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में सुसाइड केस सामने आने के बावजूद आज तक कोई प्रभावी नीति या निगरानी तंत्र नहीं बनाया गया।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार की निष्क्रियता पर चिंता व्यक्त की है और कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के लिए ठोस कानून बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है।





