कोटा। हर वर्ष जब कान्स फिल्म फेस्टिवल की चकाचौंध दुनिया भर के सिनेमा प्रेमियों और कलाकारों को आकर्षित करती है, तब यह केवल फिल्मों का मंच नहीं रहता यह सांस्कृतिक संवाद और वैश्विक के सौंदर्यबोध का भी प्रतीक बन जाता र्ण है। ऐसे में, जब एक भारतीय न्य हस्तशिल्प परिधान इस रेड कार्पेट पर अपनी गरिमा से सबका ध्यान खींचे, तो यह केवल एक फैशन स्टेटमेंट नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक वक्तव्य बन जाता है।
कोटा जरी साड़ी ने भी कोटा का नाम विश्व पटल पर ला दिया है। कोटा की प्रीति सिंह पारीक की बनी जरी साड़ी की चमक फ्रांस में फैली है। फ्रांस में आयोजित कान्स फिल्म फेस्टिवल में मास्टरकार्ड के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर राजा राजमन्नार की पत्नी ज्योति राजामन्नार ने कोटा जरी साड़ी पहनकर रेड कार्पेट पर कोटा की जरी साड़ी की चमक को बढ़ाया है।
कोटा जरी ने बिखेरी चमक:-
सोनचिरैया की सह-संस्थापक प्रीति सिंह पारीक ने बताया कि ‘कोटा की पारंपरिक जरी साड़ी कान्स फिल्म फेस्टिवल के आकर्षण का केंद्र बनी। इन साड़ियों की खूबसूरती, बुनाई और उस पर किया गया जरी कार्य इतना सूक्ष्म और भव्य है कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया।’
प्रीति ने यह भी साझा किया कि इससे पहले महारानी राधिका राजे गायकवाड़, महारानी अम्बिका राजे, मायूरभंज की महारानी राशमी राजे, टीना अम्बानी ने अनंत-राधिका की शादी में और बॉट के संस्थापक अमन गुप्ता की पत्नी प्रिया गुप्ता जैसे प्रतिष्ठित नाम भी कोटा जरी साड़ी की शोभा बढ़ा चुके हैं।
कांस में दो चमकी कोटा जरी साड़ी
कान्स फिल्म फेस्टिवल-2025 में ज्योति राजामन्नार ने दो दिनों में सोनचिरैया की विशिष्ट कोटा जरी साड़ियों को पहनकर भारतीय और शिल्पकला की अद्भुत प्रस्तुति दी। पहले दिन उन्होंने मुगल युग से प्रेरित एकल टिश्यू साड़ी पहनी, जिसमें शाही भव्यता और बारीक बुनाई की झलक थी। यह साड़ी बीते युग की गरिमा और भारतीय कारीगरी का प्रतीक बनी। दूसरे दिन उन्होंने संस्थापक प्रीति सिंह पारीक के सुझाव पर गहरे भूरे रंग की मेटैलिक जरी साड़ी पहनी, जिसमें भारतीय वनस्पति, फूलों और फ्लेमिंगो से प्रेरित डिजाइन थे। डबल टिश्यू तकनीक से बनी इस साड़ी में असली सोने संस्कृति-चांदी के धागों का उपयोग हुआ था, जिसे तैयार करने में तीन महीने का समय लगा। इस साड़ी को सब्यासाची के आभूषणों और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के हैंडबैग्स के साथ स्टाइल किया गया, जिसने पारंपरिक और वैश्विक फैशन का सुंदर मेल प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों ने भारतीय कारीगरी को वैश्विक मंच पर गौरवपूर्ण पहचान दिलाई और यह सिद्ध किया कि भारतीय वस्त्र परंपरा आधुनिक फैशन में भी उतनी ही प्रासंगिक और प्रभावशाली है।




