Thursday, September 17, 2026
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सांगोद का नहाण राजस्थानी संस्कृति से अश्लीलता की ओर

राजस्थानी संस्कृति से अश्लीलता की ओर

500 वर्ष पुराना सांगोद का सुप्रसिद्ध नहाण राजस्थान की संस्कृति, राजसी ठाठ बाठ और रजवाड़ों की छवि के लिए जाना जाता है, राजस्थान की सामान्य ज्ञान किताबों में भी इसका जिक्र होता है। ऐसा कोई रंग, पात्र नहीं है जो नहाण में देखने को नहीं मिलता महाराणा प्रताप, शिवाजी और अकबर,मानसिंह के जमाने की याद ताजा हो जाती है। एक समय था जब सांगोद नहाण में बोल पंछीडया रे, उमराव थारी बोली लागे रे, पल्लो लटके, घूमर आदि गानों पर लोग मंत्र मुग्ध हो जाया करते थे, वही ढोलक की थाप और पेटी की आवाज कर्ण प्रिय लगती थी।

लेकिन वर्तमान में किन्नरों के पहनावे और अधिक डेसीबल के गानों ने लोगों की शांति भंग कर दी है, कई वृद्ध लोग तो अब नहाण में जाना भी पसंद नहीं करते हैं। अगर डीजे साउंड चलाना भी है तो एक सीमित आवाज में चलाया जाए। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि नहाण की संस्कृति धूमिल ना हो इसलिए इस पर संज्ञान लिया जाना आवश्यक है।

नगर में सुप्रसिद्ध नहाण लोकोत्सव जारी है, इसी बीच सोमवार को किन्नर डांस के दौरान हुई एक युवक के सिर फोड़ने वाली घटना ने नगर वासियों को अचंभित है। कर दिया, दो दिन से इसकी चर्चाएं जोरों पर है घायल अभी जयपुर में ही भर्ती है। इसके तहत नहाण के कार्यकताओं ने एसडीएम के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा है, दोनों पक्ष के कार्यकर्ता से इससे पूर्ण सहमत है। ज्ञापन में जिक्र है कि सांगोद नहाण में डीजे पर केवल राजस्थानी लोक गाने चलाए जायें एवं किन्नरों के लिए राजस्थानी ड्रेस कोड पाबंद किया जाए, जिससे इस हाप्रकार की अप्रिय घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही डीजे साउंड को भी एक सीमित डेसीबल आवाज में चलाया जाए। इस ज्ञापन के बाद सांगोद एसएचओ को लिखित में पालन ना किए जाने पर नियमानुसार कार्यवाही करने के लिए कहा गया

 

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