जाती हैं निगाहें दूर तक ….
हो कितने दूर तुम लेकिन, मैं तो मन से तुम्हारे पास हूं ।
प्रिय हो तुम प्राण मेरे, मैं भी तो तुम्हारी सांस हूं ।।
जाती हैं निगाहें दूर तक, पर तुम तो नजर आते नहीं ।
जहां में हैं बहाने बहुत, पर वे दिल को बहलाते नहीं ।।
बैठे हो मेरे दिल में तुम, है एहसास भी तुम्हारा ही ।
बंधी हूं तुम्हारी याद से, पर मन है कि बहलता नहीं ।।
लौटोगे जब तुम पास मेरे, अवसाद कोई बनता नहीं ।
मैं रोज बहलाती हूं मन, यह दिल है कि बहलता नहीं ।।
इंतजार तुम्हारा तहे दिल से, उम्मीद है पूरा होगा यहीं ।
आस में गुजरे दिन तमाम, यह रातें हैं कि कटती नहीं ।।
यूं तुम भी तो हमारे हो, जहां से उम्मीद हटती नहीं ।
यह दिन गुजरते हैं कठिन, रातें हैं कि पौ फ़ट नहीं ।।
करती हूं मैं लाख कोशिश, बात है कि मन से हटती नहीं ।
उम्मीद है फिर से मिलेंगे, पर यह दूरियां भी घटती नहीं ।।
दिन तो कैसे भी ढलता है, मगर रातें हैं कि सिमटी नहीं ।
बारिश की आमद है नहीं, पर बदलियां हैं कि छटती नहीं ।। बारिश की आमद है नहीं………
पर बदलियां हैं कि छटती नहीं….
के. सी. राजपूत, कोटा।
जाती हैं निगाहें दूर तक ….- कालीचरण राजपूत






