Saturday, April 18, 2026
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जाती हैं निगाहें दूर तक ….- कालीचरण राजपूत

जाती हैं निगाहें दूर तक ….

 

हो कितने दूर तुम लेकिन, मैं तो मन से तुम्हारे पास हूं ।

प्रिय हो तुम प्राण मेरे, मैं भी तो तुम्हारी सांस हूं ।।

जाती हैं निगाहें दूर तक, पर तुम तो नजर आते नहीं ।

जहां में हैं बहाने बहुत, पर वे दिल को बहलाते नहीं ।।

बैठे हो मेरे दिल में तुम, है एहसास भी तुम्हारा ही ।

बंधी हूं तुम्हारी याद से, पर मन है कि बहलता नहीं ।।

लौटोगे जब तुम पास मेरे, अवसाद कोई बनता नहीं ।

मैं रोज बहलाती हूं मन, यह दिल है कि बहलता नहीं ।।

इंतजार तुम्हारा तहे दिल से, उम्मीद है पूरा होगा यहीं ।

आस में गुजरे दिन तमाम, यह रातें हैं कि कटती नहीं ।।

यूं तुम भी तो हमारे हो, जहां से उम्मीद हटती नहीं ।

यह दिन गुजरते हैं कठिन, रातें हैं कि पौ फ़ट नहीं ।।

करती हूं मैं लाख कोशिश, बात है कि मन से हटती नहीं ।

उम्मीद है फिर से मिलेंगे, पर यह दूरियां भी घटती नहीं ।।

दिन तो कैसे भी ढलता है, मगर रातें हैं कि सिमटी नहीं ।

बारिश की आमद है नहीं, पर बदलियां हैं कि छटती नहीं ।। बारिश की आमद है नहीं………

पर बदलियां हैं कि छटती नहीं….

के. सी. राजपूत, कोटा।

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