Saturday, April 18, 2026
IMG-20260122-WA0067
previous arrow
next arrow

Top 5 This Week

Related Posts

विश्व रेडियो दिवस विशेष- मन का रेडियो बजने दे जरा….

आपकों फिल्मों के गाने, उनके डायलॉग और उसकी डिलीवरी बरसों बाद भी याद रहती है। यहां रेडियों अपने साथी मीडिया की तुलना में खुद को महत्त्वपूर्ण साबित करता है। वाकई ऐसे कितने मीडिया है, जो अपने कंज्यूमर को एंगेज करने के लिए उसे खुला छोड देते हैं। वाकई में आप जितने भी मीडिया का इस्तेमाल करते हैं फिर भले ही टीवी हो, इंटरनेट हो या अखबार हो, आपको एक जगह बैठना ही पड़ता है। बस यही आकर रेडियो अपने सभी भाई- बंधुओं से अलग हो जाता है। आप रेडियो सुनते हुए वे सब काम कर सकते है, जो शायद आप किसी और मीडिया के साथ नहीं कर सकते। यहां तक की पढ़ा‌ई भी।

सुबह आध्यात्मिक गीतों से लेकर आपके ऑफिस पहुँचने तक लेटेस्ट गीत या दोपहर में गृहिणियों के लिए रोमांटिक गीत तथा शाम को आपके लौटने के वक्त थोड़ा तीखा, थोडा रिलैक्सिंग म्यूजिक और रात के लिए पुराने गाने । रेडियो पर सब कुछ आसान है, जिस समय जिस तरह का श्रोता हो, उसकी पंसद का गाना। यहां मूड मैपिंग का विज्ञान है। म्यूजिक थैरेपी से कई प्रयोग हुए है, लेकिन उसका जीवंत उदाहण रेडियो सुनते हुए देखा जा सकता है। रेडियो वैसे तो गीत सुनने और हल्के-फुल्के मनोरंजन के साधन के रूप में ही देखा जाता है, लेकिन विकसित देशों में इसका अन्य उपयोग भी किया जाता है। खासतौर पर अमेरिका व कनाडा में तो ट्रैफिक की जानकारी के लिए लोग रेडियो पर ही निर्भर होते है। हमारे यहां रेडियो मनोरंजन का माध्यम माना जाता है, लेकिन यह अपनी गतिविधियो के जरिये शहरों की समस्याएं दूर करने में भी भूमिका निभा सकता है। भारत में कुल 245 एफएम रेडियो स्टेशन है और जल्दी ही और भी एफएम चैनल लांच होगे । अपनी मनोरंजन शैली के साथ रोज लोगों के जीवन में कुछ नया पहुंचाने की उनकी कोशिश धीरे-धीरे रंग ला रही है।

टेक्नोलॉजी के दौर में भले ही रेडियो को लोग भूल चुके है, लेकिन आज भी रेडियो के शौकीनों आज भले ही हर गाड़ी और मोबाईल में एफएम रेडियो सुनाई दे जाता है, लेकिन शहर में रेडियो के शौकीनो के पास आज भी ऐसे-ऐसे सेट है, जिन्हें उठाने के लिए भी दो जानों की जरूरत पड़ती थी। उस जमाने में रेडियो को बजाने के लिए भी लाइसेंस अनिवार्य था। खरीदने के साथ ही लाइसेंस मिलता था। केंद्र सरकार के पास पोस्टल विभाग के माध्यम से इसकी वार्षिक फीस जमा होती थी। एंटीना अलग से लगाना पडता था। रेडियो की दुनिया में कोटा का जुड़ाव काफी पुराना रहा है। देश में कोटा और तमिलनाडु दो ही ऐसी जगह थी, जहां सामुदायिक रेडियो स्टेशन शुरु हुए।

13 फरवरी 1946 में यूनेस्को के डायरेक्टर जनरल द्वारा संयुक्त राष्ट्र रेडियो और संयुक्त राष्ट्र की अंतर्राष्ट्रीय प्रसारण सेवा की स्थापना की गई थी। इसी कारण विश्व रेडियो दिवस 13 फरवरी को मनाया जाता है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles