महिये,,,,,,,
शकूर अनवर
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1 सुख-दुख का अखाड़ा है
जीना है बहुत मुश्किल
सतराह का पहाड़ा है
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2 हैवानो चरिन्दे* भी
इन्सानों से बेहतर हैं
जंगल के दरिंदे* भी
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3 दुनिया के सितम* देखे
सुनता ही नहीं कोई
सब देरो-हरम* देखे
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4 ख़ुशरंग* फ़ज़ाओं* में
क्यूँ ज़हर मिलाते हो
इन ताज़ा हवाओं में
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,,,,,, शकूर अनवर
हैवानो चरिन्दे*जानवर,पशु
दरिंदे*जंगल के हिंसक पशु
सितम*ज़ुल्म,अत्याचार
देरो हरम*मंदिर मस्जिद
खुशरंग*ख़ूबसूरत
फ़ज़ाओ*माहौल
9460851271






