राष्ट्रीय दशहरा मेला 2026:* ‘ताल कचहरी’ में कलाकारों ने बिखेरा संगीत का जादू, जुगलबंदी देख मंत्रमुग्ध हुए श्रोता
कोटा, 29 अक्टूबर। राष्ट्रीय दशहरा मेला में गुरुवार को विजयश्री रंगमंच पर आज ‘झंकार’ कार्यक्रम के तहत ‘ताल कचहरी’ का आयोजन हुआ। जिसमें विभिन्न शास्त्रीय वाद्य यंत्रों की जुगलबंदी से संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया गया। कलाकारों ने अपनी अनूठी लयकारी और थाप से हुनर का शानदार प्रदर्शन किया। राजधानी में संगीत और कला की अनूठी संस्था द्वारा आयोजित ‘झंकार’ कार्यक्रम के मंच पर सुर, ताल और लय का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण ‘ताल कचहरी’ में देश के प्रतिष्ठित और उभरते कलाकारों ने अपने हुनर का ऐसा प्रदर्शन किया कि कार्यक्रम स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। शास्त्रीय संगीत की परंपरा को जीवंत करते हुए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथि रामरतन बैरवा अध्यक्ष, बैरवा विकास समिति, रामावतार मराठा जिला उपाध्यक्ष, भाजपा कोटा शहर, श्याम दोहडिया जिला मंत्री, भाजपा कोटा शहर, नन्दलाल प्रजापति राष्ट्रीय महासचिव, अ.भा. प्रजापति कुम्भकार महासंघ, नई दिल्ली, मेघराज रायका प्रदेश उपाध्यक्ष, अ. भा. रायका रेबारीदेवासी महासभा, राजस्थान इनके साथ महापौर अनुसूइया गोस्वामी ने भगवान श्री गणेश मां सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया।
जुगलबंदी ने जीता दिल
‘ताल कचहरी’ की शुरुआत पारंपरिक वाद्य यंत्रों की वंदना के साथ केसरिया बालम पधारो म्हारे देश से किया इसके बाद मंच पर तीन ताल, तबला, पखावज, मृदंगम और घटम जैसे वाद्य यंत्रों के बीच एक अनोखा संवाद (जुगलबंदी) शुरू हुआ। कलाकारों ने तीन ताल, झपताल और एकताल की विभिन्न शैलियों को इतनी बारीकी और खूबसूरती के साथ पेश किया कि श्रोता मंत्रमुग्ध होकर झूमने लगे। धीमी लय से शुरू होकर द्रुत गति तक पहुँचते-पहुँचते वाद्य यंत्रों की थाप ने दर्शकों की धड़कनों को बढ़ा दिया।
हुनर और कला का बेजोड़ प्रदर्शन
कार्यक्रम में वरिष्ठ उस्तादों ने पायो जी मैने राम रतन धन पायो.. सरीखे भजनों पर अपनी कला का लोहा मनवाया। युवा कलाकारों ने भी अपनी असाधारण प्रतिभा से सबका ध्यान आकर्षित किया। द्रुत गति के सोलो (एकल) वादन और फिर सामूहिक रूप से विभिन्न वादकों के बीच की ‘सवाल-जवाब’ की कड़ियों ने ‘ताल कचहरी’ के मुख्य स्वरूप को सार्थकता दी। प्रत्येक कलाकार अपनी विधा में माहिर नजर आया और उनकी अंगुलियों की जादुई छुअन ने हर एक वाद्य यंत्र से सुमधुर ध्वनियाँ उत्पन्न कीं।





