Monday, July 13, 2026
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अपना घर वृद्धाश्रम में गूंजी कविता की आवाज, कवि सम्मेलन में साहित्यकारों ने बांधा समां 

“हमारी आँख ने काफी, बड़ा सा ख्वाब देखा है

हमारी कोशिशें हैं इक, नया सूरज उगाने की.”

कोटा/अपना घर आश्रम द्वारा संचालित नव निर्मित “बृज चंद्र आश्रय – अपना घर वृद्धाश्रम” में एक भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ और युवा कवियों ने अपनी रचनाओं से वृद्धजनों और श्रोताओं का मन मोह लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जनकवि बृजेन्द्र कौशिक, हंसराज चौधरी और अपना घर आश्रम के अध्यक्ष डॉ. योगेन्द्र मणि कौशिक के अध्यक्षीय मंडल के सान्निध्य में हुई। मुख्य अतिथि नीरज मित्तल सीजेएम कोटा रहे। वहीं अमित कुमार शर्मा एडीजे कोटा और श्रीमती शिखा सिंघल, एसीजेएम कोटा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ युवा कवि लोकेश मृदुल की सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद हाड़ौती के मीठे गीतकार मुरलीधर गौड़ ने कवि सम्मेलन की शानदार शुरुआत की। बद्रीलाल दिव्य और हंसराज चौधरी ने अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को नई ऊंचाइयां दीं।

युवा कवि डॉ. उदय मणि ने आमजन का आह्वान करते हुए कहा:-

“हमारी कोशिशें हैं इस, धरा को जगमगाने की

हमारी आँख ने काफी, बड़ा सा ख्वाब देखा है

हमारी कोशिशें हैं इक, नया सूरज उगाने की…”_

कवि सम्मेलन में नागेन्द्र कुमावत,रफ़ीकुर्रहमान , इमरोज़ सिकन्दराबादी, हलीम आईना, जगदीश निराला, मयंक सोलंकी और मदन मोहन सरल ने भी अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

युवा रचनाकार कपिल मणि ने गीत के माध्यम से सामाजिक मुद्दा उठाते हुए कहा – “भूख गरीबी, बेकारी पर, हल्ला बोल, हल्ला बोल”। वरिष्ठ जनकवि महेन्द्र नेह ने वर्तमान परिस्थितियों पर तीखे शब्दों में कटाक्ष किया:

“जो घर थे हमारे वो घर न रहे

दीवारें तो हैं पर दर न रहे

हैं धड़ सबूत मगर सर न रहे।”

व्यंग्यकार डॉ. योगेन्द्र मणि कौशिक ने कलम की आजादी पर जोर देते हुए कहा:

“यह कलम स्वतंत्र है, जो उचित होगा लिखेगी

अंतिम क्षण तक संघर्ष करेगी, लेकिन तिजोरी की कैद कभी स्वीकार नहीं करेगी।”

अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ जनकवि बृजेन्द्र कौशिक ने कहा:

“बस्ती बस्ती उदास लगती है

जितना भी पिओ पानी

उतनी ही ज़्यादा प्यास लगती है।”

गीतकार जगदीश निराला ने अपना घर आश्रम अध्यक्ष को सम्मान पत्र और उनकी प्रकाशित हाड़ौती व हिंदी गीतों की दो पुस्तकें भेंट कीं। मुख्य अतिथि नीरज मित्तल ने वरिष्ठ कवि बृजेन्द्र कौशिक को स्मृति चिह्न भेंट किया। अपना घर संरक्षक राजेश शर्मा और वित्त सचिव सतीश चंद्र गुप्ता ने सभी मुख्य अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। सभी आमंत्रित कवियों को भी अपना घर आश्रम की ओर से सम्मान पत्र प्रदान किए गए।

कार्यक्रम का कुशल संचालन युवा कवि डॉ. उदय मणि ने किया।

अपना घर आश्रम संरक्षक राजेश शर्मा ने बताया कि इस तरह के आयोजन वृद्धजनों को मानसिक संबल देने और समाज को साहित्य से जोड़ने के उद्देश्य से प्रारम्भ किए गए हैं ।भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रमों के साथ शीघ्र ही गीत संगीत आदि के मनोरंजक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएँगे ।

 

 

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