ग़ज़ल
उड़ान अब आसमानी चाहती है।
मुहब्बत कामरानी* चाहती है।।
*
तुम्हारी तिश्नगी* ने ख़ून माॅंगा।
हमारी प्यास पानी चाहती है।।
*
किनारों से उबल पड़ती है अक्सर।
नदी तो ख़ुद रवानी* चाहती है।।
*
तेरे चेहरे की ये रानाई* मुझसे।
मेरी जादू – बयानी* चाहती है।।
*
सुकूनत*अब नहीं मुमकिन ज़मीं पर।
मकानी ला-मकानी* चाहती है।।
*
कोई मेहमान ठहरे अब तो दिल में।
तबीयत मेज़बानी* चाहती है।।
*
कोई तो मोड़ आये ज़िन्दगी में । हक़ीक़त भी कहानी चाहती है।।
*
लड़ाती है हमें आपस में “अनवर”।
सियासत हुक्म रानी* चाहती है।।
*
शब्दार्थ
कामरानी*सफलता
तिशनगी*प्यास तृष्णा
रवानी*तेज़ी
रानाई*खूबसूरती सुंदरता
जादू -बयानी*चमत्कारिक वर्णन
सुकूनत*निवास
ला -मकानी*विश्व व्यापी घर
मेज़बानी*मेहमान नवाजी
हुक्मरानी*सत्ता
*
✍शकूर अनवर
📞9460851271




