Thursday, July 2, 2026
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सुनील कुमार साहू को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया सम्मानित

दोनों हाथ और सीधे पैर क्षतिग्रस्त, भाई ,पापा,बहन को खोया तथा खेल में 5 साल लगातार असफल और आर्थिक संघर्षों के बावजूद 20 पदक जीतकर बनाया राष्ट्रीय स्तर पर नाम

कोटा/राजस्थान के अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट सुनील कुमार साहू को खेल जगत में उत्कृष्ट कार्य, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन और प्रेरणादायक संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री माननीय अमित शाह द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान सुनील के लिए केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके परिवार, मां प्रेम देवी, छोटे भाई अनिल, प्रशिक्षकों और उन सभी लोगों के संघर्ष का सम्मान है जिन्होंने कठिन समय में उनका साथ दिया।

सुनील कुमार साहू ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। राष्ट्रीय खेलों में वे अब तक 6 पदक जीत चुके हैं और राजस्थान का 6 बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। गत तीन वर्षों में उन्होंने कुल 20 पदक अपने नाम किए हैं, जिनमें 12 स्वर्ण पदक शामिल हैं। वे पैरा एथलेटिक्स की T-38 श्रेणी में 100 मीटर, 400 मीटर और लंबी कूद स्पर्धाओं में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।

सुनील का जीवन असाधारण संघर्षों से भरा रहा है। वर्ष 2012 में उनके बड़े भाई का निधन हो गया। इसके बाद वर्ष 2013 में रिसीवर ब्लास्ट की दुर्घटना में उनके दोनों हाथ और सीधा पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। लंबे समय तक आईसीयू में उपचार के बाद उन्होंने जीवन की नई शुरुआत की। इसके बाद पिता का साइलेंट अटैक से निधन हो गया और फिर बड़ी बहन भी दुनिया छोड़ गईं। लगातार आए इन संकटों के बाद भी उन्होंने अपने जीवन को हार नहीं बनने दिया।

बचपन से उनका सपना सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने का था, लेकिन दुर्घटना के बाद वह सपना पूरा नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने संकल्प लिया कि खेलों के माध्यम से भारत का नाम रोशन करेंगे। वर्ष 2017-18 में जिला स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने के बाद भी उन्हें लगातार पांच वर्षों तक असफलता का सामना करना पड़ा और कोई पदक नहीं मिला। फिर भी उन्होंने प्रशिक्षण नहीं छोड़ा।

आर्थिक परिस्थितियां इतनी कठिन थीं कि अपने सपने को जिंदा रखने के लिए सुनील ने शादियों में प्लेट साफ करने, रिक्शा चलाने और निजी स्कूल में पढ़ाने तक का काम किया। कोरोना महामारी के दौरान भी उन्होंने अभ्यास जारी रखा। उनकी मां ने मजदूरी, अस्पतालों में सफाई, शादियों में खाना बनाने और बेलदारी जैसे काम कर बेटे के खेल सपने को सहारा दिया, जबकि छोटे भाई अनिल ने निजी नौकरी के साथ उनका सहयोग किया।

रहिए।

खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सुनील कुमार साहू को इंटरनेशनल यूथ आइकॉन अवॉर्ड, मेजर ध्यानचंद समर्पण नेशनल अवॉर्ड तथा राजस्थान सरकार द्वारा सर्वश्रेष्ठ विशेष योग्यजन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उनके उत्कृष्ट खेल योगदान के लिए केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और खेल जगत से जुड़े लोगों ने उनका सम्मान कर हौसला बढ़ाया है। राजस्थान के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, ऊर्जा मंत्री, खेल मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, केंद्रीय मंत्रियों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी समय-समय पर उन्हें सम्मानित किया और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रोत्साहित किया।

सुनील की उपलब्धियों को राजस्थान करंट जीके और इंडिया करंट जीके की शैक्षणिक पुस्तकों में भी स्थान मिला है, जिससे उनकी संघर्षगाथा विद्यार्थियों तक पहुंच रही है।

सुनील कुमार साहू का कहना है,

“दुर्घटना में मेरे दोनों हाथ और सीधा पैर क्षतिग्रस्त हुए, भाई, पिता और बहन को खोया, घर की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी। खेलों में पांच साल तक असफल रहा, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। मैंने अपनी दिव्यांगता को अपनी कमजोरी नहीं, अपनी ताकत बनाया। जब मैं कर सकता हूं, तो आप भी कर सकते हैं। अपनी कमजोरी को मजबूत पक्ष बनाइए और लगातार मेहनत करते रहिए।

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