कोटा/ मई। साहित्य, संस्कृति और भारतीय चिंतन की समृद्ध परंपरा को नई दिशा देने के उद्देश्य से अखिल भारतीय साहित्य परिषद, राजस्थान का 9वां प्रदेश अधिवेशन 30 और 31 मई को कोटा में आयोजित होगा। दो दिवसीय इस अधिवेशन का मूल विषय ‘आत्मबोध से विश्वबोध मंथन’ रहेगा, जो आयोजन की वैचारिक धुरी होगा और व्यक्ति से विश्व तक चेतना के विस्तार पर गहन संवाद का आधार बनेगा।
गुरुवार को आयोजन के आमंत्रण पत्र का विमोचन सहसंयोजक महेश विजय,सयोजक विष्णु शर्मा,सहसंयोजक राजेन्द्र गौड़,कोटा विभाग संयोजक योगी राज,प्रचार मंत्री राजेन्द्र मोरपा,प्रांतीय उपाध्यक्ष राजेन्द्र गौड़ सहित कई परिषद पदाधिकारियों ने किया।
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अन्नाराम शर्मा एवं प्रदेश महामंत्री डॉ. केशव शर्मा ने बताया कि चित्तौड़ प्रांत के तत्वावधान में यह अधिवेशन राजकीय आयुर्वेदिक योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय, तलवंडी में आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रदेशभर से साहित्यकार, शिक्षाविद्, चिंतक और परिषद पदाधिकारी भाग लेंगे।
मुख्य संयोजक विष्णु शर्मा ने बताया कि दो दिवसीय कार्यक्रम में प्रांतीय बैठक, लोकमंथन, बाल साहित्य, लोक साहित्य और संगठनात्मक विषयों पर चर्चा के साथ ‘आत्मबोध से विश्वबोध’ विषय पर विशेष व्याख्यान और विमर्श आयोजित होंगे। अधिवेशन का उद्देश्य भारतीय जीवन-दृष्टि, सांस्कृतिक चेतना और साहित्यिक संवाद को व्यापक सामाजिक संदर्भों से जोड़ना है।
सहसंयोजक महेश विजय के अनुसार 30 मई को प्रातः 10:45 बजे उद्घाटन सत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के मुख्य आतिथ्य में होगा। इसकी अध्यक्षता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुशील चंद्र त्रिवेदी करेंगे, जबकि राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. पवनपुत्र बादल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
31 मई को समापन समारोह में कृषि विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. विमला डूंकवाल मुख्य अतिथि होंगी। कार्यक्रम को पूज्य विनय कुमार महाराज, अधिष्ठाता बड़े महाप्रभुजी मंदिर, पाटनपोल का सान्निध्य प्राप्त होगा तथा अध्यक्षता परिषद के अखिल भारतीय महामंत्री डॉ. भरत ठाकोर करेंगे।
अधिवेशन में प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकारों की सहभागिता रहेगी और उनकी चार पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद वर्ष 1966 से राष्ट्रीय स्तर पर साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से भारतीय चिंतन को सशक्त बनाने का कार्य कर रही है। राजस्थान में इसकी गतिविधियाँ चित्तौड़, जयपुर और जोधपुर प्रांतों के माध्यम से संचालित होती हैं।












