रामावतार राठौर
बूंदी/क्रीड़ा भारती बूंदी द्वारा खेल संकुल बूंदी में आयोजित “प्रथम दिव्यांग खेल गौरव सम्मान समारोह” सोमवार सायंकाल भावनात्मक, प्रेरणादायी एवं ऐतिहासिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। चित्तौड़ प्रांत में अपने प्रकार के इस प्रथम आयोजन में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों का माल्यार्पण, प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम ने उपस्थित जनसमूह को संघर्ष, आत्मविश्वास, राष्ट्रभक्ति और सकारात्मक सोच का संदेश दिया।
समारोह में अंतरराष्ट्रीय पेरा एथलेटिक्स खिलाड़ी, इंटरनेशनल सिल्वर मेडलिस्ट, इंटरनेशनल यूथ आइकॉन अवॉर्डी सुनील कुमार साहू को “दिव्यांग खेल गौरव पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने के बाद सुनील कुमार साहू ने मंच से खिलाड़ियों और युवाओं को प्रेरणादायी संबोधन दिया। उन्होंने अपने संघर्षमय जीवन की कहानी साझा करते हुए बताया कि जीवन में कठिन परिस्थितियां इंसान को कई बार तोड़ने का प्रयास करती हैं, लेकिन मजबूत हौसले, मेहनत और आत्मविश्वास व्यक्ति को सफलता तक पहुंचाते हैं।
उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और जीवन में आगे बढ़ने की सबसे बड़ी शक्ति है। सुनील कुमार साहू ने खिलाड़ियों को संदेश देते हुए कहा कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, कभी हार नहीं माननी चाहिए। निरंतर अभ्यास, धैर्य और सकारात्मक सोच से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनके प्रेरणादायी विचारों को सुनकर पूरा सभागार तालियों की गूंज से गूंज उठा।
जिला संयोजक अंकुर निंबार्क ने बताया कि क्रीड़ा भारती द्वारा आयोजित इस विशेष सम्मान समारोह का उद्देश्य उन दिव्यांग प्रतिभाओं को समाज के सामने लाना है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने परिश्रम और प्रतिभा से राष्ट्र का गौरव बढ़ाया है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री माननीय प्रसाद महानकर रहे। अध्यक्षता चित्तौड़ प्रांत मंत्री बालमुकुंद यादव ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रांत क्रीड़ा केंद्र प्रमुख विजयभान सिंह चौहान, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कोटा विभाग कुटुंब प्रबोधक ब्रह्मदत्त शर्मा तथा जिला हैंडबॉल संघ अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह सोलंकी मंचासीन रहे।
मुख्य अतिथि प्रसाद महानकर ने कहा कि दिव्यांग खिलाड़ी केवल खेल मैदान के योद्धा नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और राष्ट्र समर्पण के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जिन खिलाड़ियों ने शारीरिक चुनौतियों के बावजूद देश के लिए पदक अर्जित किए हैं, उनका सम्मान वास्तव में भारत की आत्मशक्ति और संकल्प का सम्मान है। उन्होंने संगठन के उद्देश्यों, क्रीड़ा केंद्रों के संचालन तथा क्रीड़ावृति को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर भी विचार साझा किए।
अध्यक्षता कर रहे बालमुकुंद यादव ने कहा कि खेल केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का माध्यम है। दिव्यांग खिलाड़ियों को सम्मानित करने का यह प्रयास समाज में नई चेतना और सकारात्मक दृष्टिकोण का संदेश देगा।
समारोह में अंतरराष्ट्रीय पेरा क्रिकेट खिलाड़ी नरेंद्र शर्मा, दिव्यांग महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप स्वर्ण पदक विजेता सिमरन कौर, नेशनल पेरा एथलेटिक्स स्वर्ण पदक विजेता सुदर्शन मीणा, पेरा ताइक्वांडो खिलाड़ी लव गोचर तथा पेरा सब जूनियर सिल्वर मेडलिस्ट काजल सहित अन्य प्रतिभाओं का सम्मान किया गया। खिलाड़ियों के सम्मान के दौरान पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कार्यक्रम में खिलाड़ियों ने अपने संघर्ष, उपलब्धियों और अनुभवों को साझा करते हुए युवाओं को प्रेरित किया। खिलाड़ियों ने बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद निरंतर अभ्यास, आत्मविश्वास तथा परिवार और समाज के सहयोग से सफलता प्राप्त की जा सकती है।
इस अवसर पर संकल्प योगशाला के योग खिलाड़ियों द्वारा आकर्षक एवं कलात्मक योग प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का संचालन भूपेन्द्र योगी ने किया तथा जिला संयोजक अंकुर निंबार्क ने आभार व्यक्त किया।










