– अखिल नामा
जयपुर/कोटा के महाराव एवं पूर्व सांसद इज्यराज सिंह ने शाहबाद क्षेत्र के जंगलों को काटने की प्रस्तावित योजना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे प्रकृति, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत घातक बताया। उन्होंने कहा कि शाहबाद का जंगल केवल वन क्षेत्र नहीं, बल्कि जैव विविधता, जल-संरक्षण और स्थानीय जीवन-यापन का आधार है, जिसे किसी भी कीमत पर नष्ट नहीं किया जाना चाहिए।
श्री सिंह यह विचार स्वर्गीय पूर्व मंत्री भरत सिंह पर प्रकाशित पुस्तक के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय भरत सिंह सदैव जनहित, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों के प्रति संवेदनशील रहे। यदि वे आज जीवित होते, तो निश्चित ही शाहबाद के जंगलों की कटाई के विरुद्ध सबसे आगे खड़े होते।
उन्होंने कहा कि शाहबाद का जंगल क्षेत्र का जंगल पूरे हाड़ौती अंचल के लिए हरित फेफड़ों की तरह है। यहां की वन संपदा, वन्यजीव और प्राकृतिक संसाधन न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं, बल्कि स्थानीय किसानों, आदिवासी समुदायों और ग्रामीणों की आजीविका से भी सीधे जुड़े हुए हैं।
महाराव इज्यराज सिंह ने राज्य एवं केंद्र सरकार से अपील की कि विकास योजनाओं की आड़ में पर्यावरण के साथ खिलवाड़ न किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि जंगल कटेंगे तो इसका दुष्परिणाम जल संकट, तापमान वृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं के रूप में सामने आएगा।
उन्होंने नागरिक समाज, पर्यावरण प्रेमियों और जनप्रतिनिधियों से भी आह्वान किया कि वे एकजुट होकर शाहबाद के जंगलों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाएं। “यह केवल शाहबाद या बारां का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे राजस्थान और देश के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है,” उन्होंने कहा।
समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने भी महाराव इज्यराज सिंह के विचारों का समर्थन करते हुए स्वर्गीय भरत सिंह के जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का संकल्प लिया और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर बल दिया।












