-भारत सिंह चौहान
कोटा /राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय हनुमान बस्ती दादाबाड़ी में आज स्काउट-गाइड गतिविधियों की महत्ता और विद्यार्थियों के समग्र विकास में उनकी भूमिका पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसके मुख्य वक्ता राजस्थान राज्य भारत स्काउट एवं गाइड कोटा जिले के जिला प्रधान प्रकाश जायसवाल थे। अध्यक्षता स्थानीय प्रधानाचार्य बृजेंद्र द्विवेदी ने की ।
शारीरिक शिक्षक कमल कुमार शर्मा ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा शिक्षकों को स्काउट-गाइड की उपयोगिता के प्रति जागरूक करना तथा इसे विद्यालयी शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालना था।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए द्विवेदी कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक और तकनीकी युग में बच्चों का सर्वांगीण विकास अत्यंत आवश्यक है। केवल शैक्षणिक ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, सेवा भाव और आत्मनिर्भरता जैसे गुण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें स्काउट-गाइड गतिविधियों के माध्यम से प्रभावी ढंग से विकसित किया जा सकता है
मुख्य वक्ता प्रकाश जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि स्काउट-गाइड केवल एक सह-पाठ्यक्रम गतिविधि नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है। यह विद्यार्थियों में सहयोग, सहनशीलता, जिम्मेदारी और देशभक्ति की भावना को प्रबल बनाता है। उन्होंने कहा कि स्काउट-गाइड प्रशिक्षण के दौरान बच्चे प्रकृति के करीब आते हैं, कठिन परिस्थितियों का सामना करना सीखते हैं और सामूहिक कार्य की भावना विकसित करते हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझते हैं। जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि स्काउट-गाइड गतिविधियाँ बच्चों को किताबों से बाहर निकलकर वास्तविक जीवन के अनुभव प्रदान करती हैं। इससे विद्यार्थियों का मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक विकास संतुलित रूप से होता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विद्यालयों में स्काउट-गाइड को नियमित रूप से संचालित किया जाना चाहिए और इसके लिए आवश्यक संसाधन तथा प्रशिक्षण उपलब्ध कराए जाने चाहिए। अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में बच्चों का अधिकतर समय मोबाइल और इंटरनेट पर व्यतीत होता है, जिससे उनका सामाजिक और शारीरिक विकास प्रभावित होता है। ऐसे में स्काउट-गाइड जैसी गतिविधियाँ उन्हें सकारात्मक दिशा प्रदान कर सकती हैं। उन्होंने विद्यालय प्रशासन से अनुरोध किया कि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इस कार्यक्रम से जोड़ा जाए। संगोष्ठी के दौरान कुछ विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि स्काउट-गाइड से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि हुई है।
कमल शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रशासन ने यह संकल्प लिया कि स्काउट-गाइड गतिविधियों को अधिक सशक्त बनाया जाएगा तथा अधिकाधिक विद्यार्थियों को इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही प्रशिक्षित स्काउट मास्टर और गाइड कैप्टन की नियुक्ति पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने बताया कि यह संगोष्ठी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में स्काउट-गाइड की महत्ता को रेखांकित करने में सफल रही। यह न केवल एक जागरूकता कार्यक्रम था, बल्कि भविष्य में विद्यालयी शिक्षा को और अधिक व्यावहारिक एवं जीवनोपयोगी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।






