ग़ज़ल
शकूर अनवर
गाती हुई कोयल न कोई मोर मिलेगा।
शहरों में मशीनों का फ़क़त शोर मिलेगा।।
आसान नहीं है तेरा उस पार पहुॉंचना।
मॅंझधार में तूफ़ा का बड़ा ज़ोर मिलेगा।।
ऐसे ही निगाहों को झुकाया नहीं करते।
जब दिल को टटोलोगे तो इक चोर मिलेगा।।
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बैठे से तो दुख-दर्द कभी ख़त्म न होंगे।
हिम्मत जो रखोगे तो कहीं छोर मिलेगा।।
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तपते हुए सहराओं* में क्या पाओगे “अनवर”।
पानी तो मेरे यार कहीं और मिलेगा।।
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शब्दार्थ:-
सेहराओं*रेगिस्तानों
शकूर अनवर
9460851271




