ग़ज़ल
करके ज़ेरे असर*।
यूँ न फेरो नज़र।।
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छोड़ कर तेरा दर।
अब मैं जाऊँ किधर।।
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जिस तरफ़ की नज़र।
तू ही तू जलवागर*।।
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जब से देखा उन्हें।
ख़ुद से हैं बेख़बर।।
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साथ कुछ तो चलो।
ए मेरे हम सफ़र।।
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जुस्तजू* में तिरी। हो गये दर-ब-दर*।।
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यह रहे इश्क़ है।
हर क़दम सोच कर।।
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कल का वादा अबस*।
किस को पल की ख़बर।।
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उफ़ वो रंगे हया।
आईना देखकर।।
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है ये काँटों भरी।
इश्क़ की रहगुज़र।।
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ऐसा “परकाश” है।
तीरगी* में क़मर*।।
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शब्दार्थ:-
ज़ेरे असर* प्रभाव में,
जलवागर* हुस्न दिखाई देना,
जुस्तजू* तलाश,
दर-ब-दर* घर-घर,
अबस*फ़िज़ूल,
तीरगी*ॲ॑धेरा,
क़मर* चाॅ॑द,
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वेद प्रकाश “परकाश” 44 बी. शाॅपिंग सेंटर कोटा (राज0)
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