_भारत सिंह चौहान
_इजरायल के नए फांसी कानून के विरोध में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को लिखा पत्र_
कोटा । मानवाधिकार अधिवक्ता अंसार इंदौरी द्वारा आज संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद जिनेवा को एक पत्र ज़रिए ईमेल भेजा गया है, जिसमें इजरायल द्वारा हाल ही में पारित किए गए नए फांसी‑मृत्युदंड कानून का विस्तृत विरोध किया गया है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।
उन्होंने अपने पत्र में कई बातें उठाई हैं। पत्र में लिखा गया है कि यह कानून फैसले के लिए सर्वसम्मति की आवश्यकता हटाकर मौत के दंड को सरल बहुमत से देने की संभावना खोलता है, जिससे न्यायिक गलतियों की संभावना बढ़ जाती है। इसके तहत अपील, दंडह्रास और क्षमा जैसे अवसर अत्यधिक सीमित किए गए हैं, जिससे फिलिस्तीनी कैदियों को उचित न्यायिक समीक्षा और न्यायिक निरीक्षण से वंचित करने का खतरा पैदा होता है।
कानून स्पष्ट रूप से पश्चिमी तट में रहने वाले फिलिस्तीनी नागरिकों के विरुद्ध युद्ध क्षेत्रीय न्यायालयों के जरिए लागू होता है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुसार जातीय‑आधारित भेदभाव, असमान दंड और अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है। पत्र में फांसी द्वारा निष्पादन को क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक दंड के रूप में चिन्हित करते हुए इसके विशेष रूप से एक विशेष समुदाय के विरुद्ध लक्षित उपयोग की मजबूत निंदा की गई है।
इस पत्र के माध्यम से मानवाधिकार अधिवक्ता ने परिषद से अपील की है कि वे इस मामले पर ध्यान दें। इजरायल को निर्देश दिया जाए कि वह भेदभावपूर्ण और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के विपरीत बने इस कानून को वापस ले और अपने मानवाधिकार दायित्वों का पालन करे।












