कोटा। श्री राघवेंद्र कला संस्थान के तत्वावधान में 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस की पूर्व संध्या पर समाज में व्याप्त जुए की प्रवृत्ति और नारी अपमान जैसी कुरीतियों पर करारा प्रहार करता नाटक “चीर हरण” श्रीनाथपुरम में प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया।
इस प्रस्तुति की खास बात यह रही कि दर्शकों में बालिकाएं एवं महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं, जिन्होंने नाटक के संदेश को गहराई से आत्मसात किया।
🎬 समाज को आईना दिखाता मंचन
नाटक में महाभारत के उस प्रसंग को जीवंत किया गया, जिसमें कौरव-पांडवों के बीच जुए का खेल सभ्य समाज की मर्यादाओं को तार-तार कर देता है। पितामह भीष्म और धृतराष्ट्र जैसे महान पात्रों का मौन रहना समाज की निष्क्रियता को दर्शाता है।
युधिष्ठिर द्वारा एक-एक कर अपनी संपत्ति और भाइयों को हारने के बाद अंततः द्रौपदी को दांव पर लगा देना, समाज में बढ़ती कुरीतियों का प्रतीक बनकर सामने आया।
⚡ द्रौपदी चीर हरण का मार्मिक दृश्य
दुशासन द्वारा द्रौपदी को केश पकड़कर सभा में लाना और उसके चीर हरण का प्रयास दर्शकों को झकझोर देने वाला दृश्य रहा। वहीं शकुनि द्वारा पासों के माध्यम से अनाचार को बढ़ावा देना और कौरवों की हंसी ने वातावरण को गंभीर बना दिया।
लेकिन जब अत्याचार अपनी सीमा पार करता है, तब द्रौपदी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण और उनके द्वारा उसकी लाज की रक्षा करना नाटक का चरम बिंदु रहा। इस दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया और सभागार तालियों से गूंज उठा।
🎭 कलाकारों ने बांधा समां
नाटक का निर्देशन संस्था निदेशक बृजराज गौतम ने किया, जबकि पटकथा एवं संवाद नवीन अरोड़ा द्वारा लिखे गए।
मुख्य भूमिकाओं में:-दुर्योधन – डॉ. रेवती रमण पारीक,शकुनि – नवीन अरोड़ा,दुशासन – वैभव गौतम,कर्ण – संतोष जैन,द्रौपदी – भव्या जैन,श्रीकृष्ण – आद्या गौतम,वस्त्र-श्रृंगार का कार्य रंगलाल मेहरा ने संभाला, वहीं भुवनेश जोशी और पवन दोसाया का भी विशेष योगदान रहा।
दर्शकों ने किया उत्साहवर्धन
नाटक के दौरान उपस्थित कलाकार परिवार और कथक छात्राओं ने तालियों के माध्यम से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। पूरी प्रस्तुति के दौरान दर्शकों की भावनात्मक सहभागिता देखने लायक रही।
















