बारां ,20 मार्च ।अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर 22 मार्च को शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन के तहत पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ताओं द्वारा श्रीराम स्टेडियम, बारां से शाहबाद तक एक विशाल जनजागृति विरासत यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। इस यात्रा में प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहे पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं जागरूक नागरिक भाग ले रहे हैं।
यात्रा के दौरान पर्यावरण कार्यकर्ता शाहबाद जंगल के लाखों बेशकीमती वृक्षों की कटाई तथा प्रस्तावित हाइड्रो पावर प्लांट परियोजना के विरोध में अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे। ये सभी लोग किशनगंज,भंवरगढ़ ,केलवाड़ा, समरानिया ,मुंडियर,शाहबाद में जुलूस और रैली के रूप में जंगल बचाने एवं प्लांट निरस्त करने की मांग करेंगे।शाहबाद पहुँचने पर प्रतिनिधिमंडल द्वारा एडीएम शाहबाद जब्बर सिंह जी को राष्ट्रपति महोदय के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें जंगल कटाई रोकने एवं हाइड्रो पावर प्लांट की स्वीकृति निरस्त करने की माँग की जाएगी।
इस जनआंदोलन में प्रमुख रूप से अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यकर्ता रोबिन सिंह फाउंडर ग्रीन इंडिया मूवमेंट, उत्तरप्रदेश बाबूलाल जाजू (अध्यक्ष, पीपुल्स फॉर एनिमल्स भीलवाड़ा),जयराम पाण्डेय पूर्व भारतीय वन सेवा अधिकारी (अध्यक्ष, रिटायर्ड फॉरेस्ट ऑफिसर एंड एम्प्लाइज यूनियन, जयपुर),कविता श्रीवास्तव प्रेसिडेंट पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज जयपुर),विठ्ठल सनाड्य (संयोजक, पीपुल्स फॉर एनिमल्स, बूंदी),बृजेश विजयवर्गीय (समन्वयक, चम्बल संसद, कोटा),वरदान सिंह हाडा (अध्यक्ष, जागो किसान, झालावाड़),डॉ. सुधीर गुप्ता (अध्यक्ष, हमलोग संस्था, कोटा)दिलीप शाह अध्यक्ष जिला प्रेस क्लब,बारां श्याम मनोहर हरित (संभागीयअध्यक्ष, राष्ट्रीय मानवाधिकार , पर्यावरण सुरक्षा एवं भ्रष्टाचार निवारण संगठन, कोटा),दिनेश राय द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता एवं एड, कोटा डॉ. महेंद्र नेह (विकल्प जन साहित्य समिति, कोटा),प्रशांत पाटनी पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता एवं संरक्षक शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां यज्ञदत्त हाडा (अखिल भारतीय गायत्री साधना आश्रम, कोटा) सहित हाड़ौती संभाग के अनेक गणमान्य नागरिक भाग लेंगे।आयोजकों का कहना है कि शाहबाद जंगल केवल स्थानीय क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरे हाड़ौती अंचल के पर्यावरणीय संतुलन, जलस्रोतों, जैव विविधता और भावी पीढ़ियों के जीवन से जुड़ा हुआ है। जंगल की कटाई किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नही है।






