कोटा | । जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) का जन्म कल्याणक महा महोत्सव 12 मार्च को पूरे भारतवर्ष में श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह पर्व चैत्र कृष्ण नवमी के पावन दिन मनाया जाता है, जो भगवान आदिनाथ के जन्म और उनके तपस्वी जीवन की मंगलमयी स्मृतियों को जीवंत करता है। इस अवसर पर देशभर के जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक, भक्तामर महामंडल विधान तथा पालना झुलाने जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इसी कड़ी में पुण्योदय अतिशय क्षेत्र नसिया जी दादाबाड़ी, कोटा में भी स्थापना दिवस एवं देवाधिदेव 1008 श्री आदिनाथ भगवान के जन्म कल्याणक महा महोत्सव के उपलक्ष्य में दो दिवसीय भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
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भक्तामर पाठ, पालना महोत्सव और भव्य भजन संध्या
12 मार्च, गुरुवार को चैत्र कृष्ण नवमी – तीर्थंकर दिवस के अवसर पर सायंकाल 7:30 बजे भक्तामर पाठ एवं आरती का आयोजन हुआ। इसके पश्चात रात्रि 8 बजे भगवान आदिनाथ के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में माता मरुदेवी एवं पिताश्री नाभिराय के ललना का पालना झुलाने का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस दौरान मंगल गीत, बधाइयाँ तथा भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध संगीतकार सौरभ सिद्धार्थ के सान्निध्य में संगीतमय प्रस्तुति हुई, जिसमें श्रद्धालुओं को अनेक आकर्षक उपहार एवं पुरस्कार प्रदान किए गए।
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स्थापना दिवस पर हुआ “पुण्योदय श्री बड़े बाबा विधान”
13 मार्च, शुक्रवार को स्थापना दिवस के अवसर पर प्रातःकाल “पुण्योदय श्री बड़े बाबा विधान” का आयोजन हुआ। यह पावन विधान प्रथम बार आर्यिका 105 श्री प्रशममति माताजी द्वारा रचित है, जो उनके ही पावन मुखारविंद से तथा विधानाचार्य जितेन्द्र जी शास्त्री के सान्निध्य में भक्तिमय एवं संगीतमय वातावरण में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर 48 इन्द्र–इन्द्राणी जोड़ों ने विधान में भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त किया।
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भव्य रथ-बग्गियों में निकली शोभायात्रा
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण देवाधिदेव 1008 श्री आदिनाथ भगवान की भव्य रथ एवं बग्गियों में निकली शोभायात्रा रही। विधान के पश्चात निकाली गई इस शोभायात्रा में रानी उरविला के साथ जैन धर्म की प्रभावना करते हुए श्रद्धालुओं ने नगर के मुख्य मार्गों से भ्रमण किया।
आयोजन समिति ने बताया कि समाज के सभी श्रद्धालुजनों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस भक्तिमय एवं संगीतमय स्थापना दिवस महोत्सव को सफल बनाया।
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🟨 : कार्यक्रम में प्रमुख पात्र एवं संयोजक
सौधर्म इन्द्र
ब्र. धनसिंह जी – चन्द्रकांता जी, संजय–चन्दन, शौर्य–धैर्य जैन (पिड़ावा परिवार)
ईशान इन्द्र
पदम जी, राजेन्द्र जी, हुकम जी काका, प्रकाश जी, प्रतीक, तक्ष – समस्त हरसौरा परिवार
कुबेर
महावीर जी – भारती जी, नेहा, जूही, सिद्धार्थ – समस्त मित्तल परिवार
रानी उरविला
जम्बू जी – अर्चना (रानी) जी, अभिमन्यु, दीपांशी, दिव्यांश, मुस्कान – दुगेरिया सर्राफ परिवार
सनतकुमार इन्द्र
राजेन्द्र जी – राजेश जी, रवि जी – राशि जी, चित्रांग, वृति – जैन धींग गुड़ वाले परिवार
यज्ञनायक
सुशीला बाई, अशोक जी, राजकुमार जी, विवेक जी, आनंद जी, विकास जी – ठौरा परिवार
दीप प्रज्वलन
पदम जी, राजेन्द्र जी, हुकम जी काका, प्रकाश जी, प्रतीक, तक्ष – हरसौरा परिवार
चित्र अनावरण
महावीर जी – भारती जी, सिद्धार्थ – मित्तल परिवार
पुरस्कार वितरण
सुशीला बाई, अशोक जी, राजकुमार जी, विवेक जी, आनंद जी, विकास जी – ठौरा परिवार






