Tuesday, April 21, 2026
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जीव के प्रति दयाभाव रखो – श्रमण मुनि 108 श्री योगसागर जी

आचार्य विद्यासागर पाठशाला के 21 बच्चों ने किया फास्ट फूड त्याग – जम्बू जैन सर्राफ

कोटा/पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसिया जी दादाबाड़ी में आज प्रातः 9 बजे ज्येष्ठ श्रेष्ठ निर्यापक श्रमण मुनि 108 श्री योगसागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में शांतिधारा, पूजन-अर्चन एवं पादप्रक्षालन का आयोजन संपन्न हुआ।

क्षेत्र अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ ने जानकारी देते हुए बताया कि धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक मुनि 108 श्री योगसागर जी महाराज ने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मनुष्य का दृष्टिकोण बदल गया है। दूसरों के प्रति दयाभाव समाप्त होता जा रहा है, इसी कारण सब कुछ होते हुए भी व्यक्ति दुखी और परेशान है। इसके लिए हम स्वयं ही कर्ता हैं।

मुनि श्री ने सम्यक दृष्टि विकसित करने, विषयों के प्रति आसक्ति से बचने तथा इंद्रियों पर नियंत्रण रखने का संदेश दिया। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि साधु और गृहस्थ एक समान रोटी ग्रहण करते हैं, फिर भी साधु कर्मों की निर्जरा करता है और गृहस्थ पाप का भागी बन जाता है— इसका कारण तृष्णा और अहंकार है। जब तक तृष्णा पर नियंत्रण और अहंकार में कमी नहीं होगी, आत्मकल्याण संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि शेर कभी शेर का शिकार नहीं करता, किंतु आज मनुष्य ही मनुष्य के पीछे पड़ा है— यह गंभीर चिंतन का विषय है।

उपाध्यक्ष धर्मचंद धनोपिया ने बताया कि पूर्व में निरामय सागर जी महाराज ने भी संदेश दिया था कि यदि संयमी नहीं बन सकते तो कम से कम सद्गृहस्थ अवश्य बनें। जिनेंद्र देव की स्तुति, स्वाध्याय, धर्म के प्रति पूर्ण आस्था, सद्गुरु के गुणों का बखान, दूसरों के अवगुणों से दृष्टि हटाना एवं हितकारी वचनों का प्रयोग जीवन सुधार के मूल आधार हैं। वर्तमान समय अत्यंत नाजुक मोड़ पर है, अतः समय रहते सुधार आवश्यक है।

महामंत्री महेंद्र कासलीवाल ने बताया कि धर्मसभा की शुरुआत आचार्य भगवंत 108 विद्यासागर जी महाराज की पूजा से हुई। पूजन के पश्चात 1008 बड़े बाबा श्री आदिनाथ भगवान, आचार्य महाकवि विद्यासागर जी महाराज, आचार्य समय सागर जी महाराज, निर्यापक श्रमण मुनि योगसागर जी महाराज एवं सुधा सागर जी महाराज के चित्रों का अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य श्रीमती सुशीला देवी एवं विकास ठोरा परिवार (संधारा वाले) को प्राप्त हुआ।

हुकम जैन काका ने बताया कि मुनि श्री के श्रीचरणों में श्रीफल अर्पित कर दादाबाड़ी नसिया जी में 17 फरवरी को राष्ट्रसंत आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की सल्लेखना (समाधि) दिवस, अष्टानिका, सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं दीर्घकालीन प्रवास हेतु निवेदन किया गया।

प्रशासनिक मंत्री अर्चना (रानी) सर्राफ ने बताया कि निर्यापक श्रमण मुनि योगसागर जी महाराज को आहार देने का सौभाग्य ऋषभ, मनीष एवं जयंत राजू मोहिवाल परिवार को प्राप्त हुआ।

पाठशाला संयोजिका एवं कार्यकारिणी सदस्या सरिता ठग ने बताया कि आचार्य विद्यासागर पाठशाला के लगभग 35 बच्चे गुरु भक्ति आरती के पश्चात पूज्य निर्मोह सागर जी महाराज के सानिध्य में अनुशासित रूप से उपस्थित हुए। महाराज श्री ने बच्चों को देव-शास्त्र-गुरु के प्रति विनय करना सिखाया तथा जैन सिद्धांत एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से फास्ट फूड के दुष्परिणाम समझाए। प्रेरित होकर 21 बच्चों ने फास्ट फूड का त्याग करने का संकल्प लिया।

प्रशासनिक मंत्री पारस दोराया ने बताया कि मुनि संघ की व्यवस्थाओं में पूरा समाज एकजुटता से लगा हुआ है। कल प्रातः 9 बजे मुनि श्री के प्रवचन पुनः दादाबाड़ी पुण्योदय तीर्थ नसिया जी में ही होंगे।

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