Tuesday, February 10, 2026
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अब राजस्थान की मरु धरा कहलायेगी मिनी सिलिकॉन वैली

✍️डॉ नयन प्रकाश गांधी

“रेत के धोरों में अब तकनीक का सूरज उगेगा। भजनलाल सरकार की सेमीकंडक्टर नीति ने प्रदेश को वैश्विक मानचित्र पर लाने की ठोस नींव रख दी है,इससे ‘टेक-सिटी’ आधारित शहरीकरण का एक नया मॉडल उभरेगा, जो पर्यावरण-संवेदी और ऊर्जा-कुशल होगा”

“यदि जोधपुर-पाली-बालोतरा क्षेत्र में हाई-टेक हब का निर्माण होता है और यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के परिचालन तक वह दिन दूर नहीं होगा जब कोटा-बूंदी, अर्थात् हाड़ौती क्षेत्र के लिए भी आईटी हब बनने का द्वार खुल जाएगा

इक्कीसवीं सदी का तेल ‘डेटा’ है, तो उस डेटा को संचालित करने वाला इंजन ‘सेमीकंडक्टर’ (चिप) है। आज सुई से लेकर उपग्रह तक, और मोबाइल से लेकर मिसाइल तक ,बिना चिप के आधुनिक विश्व की कल्पना असंभव है। ऐसे में राजस्थान सरकार द्वारा ‘राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी’ की घोषणा करना न केवल एक साहसिक कदम है, बल्कि यह प्रदेश की औद्योगिक दिशा को पारंपरिक ढर्रे से निकालकर ‘फ्यूचर रेडी’ (भविष्य के लिए तैयार) बनाने का एक शंखनाद है।केंद्र की मोदी सरकार ने ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के जरिए भारत को चिप निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने का जो बीड़ा उठाया है, राजस्थान सरकार ने उसी मिशन में अपनी आहुति देते हुए ‘डबल इंजन’ की शक्ति का परिचय दिया है। यह नीति यह साबित करती है कि राजस्थान अब केवल पर्यटन और खनिजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीक की दुनिया में भी अपनी धाक जमाएगा।

🕎जोधपुर-पाली-मारवाड़: सिलिकॉन वैली बनने की ओर

नई नीति का सबसे अहम उद्देश्य ‘प्रायोरिटी सेमीकंडक्टर कोरिडोर्स’ का निर्धारण है। सरकार ने जोधपुर-पाली-मारवाड़ और कांकाणी औद्योगिक क्षेत्रों को इस कॉरिडोर के रूप में चिह्नित कर एक मास्टरस्ट्रोक खेला है। यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और यहाँ औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं।जब सरकार इन कोरिडोर्स में निवेशकों को ‘फास्ट-ट्रैक’ भूमि आवंटन और ‘सिंगल विंडो’ क्लीयरेंस (राजनिवेश पोर्टल के माध्यम से) देने की बात करती है, तो यह स्पष्ट होता है कि मंशा केवल एमओयू करने की नहीं, बल्कि धरातल पर उद्योग उतारने की है। ओएसएटी और एटीएमपी जैसी इकाइयों पर फोकस करना यथार्थवादी है, क्योंकि चिप निर्माण की पूरी प्रक्रिया में असेंबली और टेस्टिंग एक बड़ा और रोजगार-परक हिस्सा है।

👨‍💻युवाओं के सपनों को मिलेंगे पंख

युवा मैनेजमेंट विश्लेषक पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट डॉ नयन प्रकाश गांधी का मानना है कि राजस्थान के युवाओं के लिए यह खबर किसी उत्सव से कम नहीं है। हाल फिलहाल अब तक यहाँ के इंजीनियरिंग छात्रों को कोर इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप डिजाइन में करियर बनाने के लिए बेंगलुरु, हैदराबाद या विदेश का रुख करना पड़ता था। सेमीकंडक्टर हब बनने से प्रदेश में ‘फैबलेस डिजाइन’ का इकोसिस्टम तैयार होगा। इसका सीधा अर्थ है उच्च वेतन वाली व्हाइट कॉलर नौकरियां अब जयपुर और जोधपुर में उपलब्ध होंगी।जब एक बड़ी चिप कंपनी आती है, तो उसके साथ सैकड़ों सहायक उद्योग भी पनपते हैं। लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, और सर्विस सेक्टर में रोजगार की बहार आएगी। यह पलायन रोकने का सबसे कारगर उपाय सिद्ध हो सकता है।

🛣️इंडस्ट्री-एकडेमिक लिंकेज और ग्रीन टेक-सिटी मॉडल

इंडस्ट्री-एकडेमिक लिंकेज और ग्रीन टेक-सिटी मॉडल

राजस्थान में विकसित होता यह तकनीकी इकोसिस्टम केवल औद्योगिक निवेश या रोजगार सृजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह प्रदेश के सामाजिक–आर्थिक परिदृश्य में एक मौलिक परिवर्तन का वाहक बनेगा। “डिजिटल इंडिया” और “मेक इन इंडिया” की संयुक्त भावना के अनुरूप, यह नीति राज्य के शैक्षणिक, अनुसंधान एवं नवाचार संस्थानों को भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाने की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगी। राजस्थान में वर्तमान में आठ से अधिक प्रमुख तकनीकी विश्वविद्यालय और अनेक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज सक्रिय हैं, और कई उच्चस्तरीय विश्वविद्यालय ,महाविद्यालय मान्यता की प्रतिक्षा में है ,लेकिन पारंपरिक कोर्स संरचना अब तक उद्योग की वास्तविक मांगों से पूर्णतः मेल नहीं खा पाई है। सेमीकंडक्टर नीति इन संस्थानों में “इंडस्ट्री-अकादमिक लिंकेज” को संस्थागत स्तर पर सुदृढ़ करने की दिशा में निर्णायक कदम होगी। राज्य सरकार पुणे ,बेंगलुरु ,हैदराबाद में तर्ज पर यदि चिप डिजाइन, नैनोटेक्नोलॉजी, और एआई-इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे भावी विषयों पर विशेष पीजी डिप्लोमा या बी.टेक वीएलएसआई डिजाइन ,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ,डाटा साइंसेज जैसे कोर्स शुरू करती है, तो यह न केवल रोजगार तैयार करेगा, बल्कि स्थानीय प्रतिभाओं को भी वैश्विक उद्योग में नेतृत्व की भूमिका के लिए तैयार करेगा।इसके अतिरिक्त, इस नीति का प्रभाव पॉलिसी गवर्नेंस और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में भी देखा जा सकेगा। अब तक औद्योगिक निवेश मुख्यतः जयपुर और सिरोही क्षेत्रों तक सीमित था, परंतु यदि जोधपुर-पाली-बालोतरा क्षेत्र में हाई-टेक हब का निर्माण होता है और यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के परिचालन तक वह दिन दूर नहीं होगा जब कोटा-बूंदी, अर्थात् हाड़ौती क्षेत्र के लिए भी आईटी हब बनने का द्वार खुल जाएगा। इस प्रकार, यह विस्तार केवल पश्चिमी राजस्थान की औद्योगिक समृद्धि को नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्वी राजस्थान की तकनीकी प्रगति को भी गति देगा। यह ‘रीजनल बैलेंस्ड ग्रोथ’ की दिशा में एक नीति-नवाचार होगा, जिससे ग्रामीण-शहरी आय-अंतर घटेगा और स्थानीय अवसंरचना जैसे सड़कों, जलापूर्ति, और डिजिटल कनेक्टिविटी में तीव्र सुधार होगा। सेमीकंडक्टर क्षेत्र के निवेशक केवल फैक्ट्री नहीं लाएंगे, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले आवासीय, स्वास्थ्य और शैक्षणिक सुविधाएं भी विकसित करेंगे। इससे ‘टेक-सिटी’ आधारित शहरीकरण का एक नया मॉडल उभरेगा, जो पर्यावरण-संवेदी और ऊर्जा-कुशल होगा, जिसे ‘ग्रीन सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम’ कहा जा सकता है।राज्य सरकार यदि स्थानीय एमएसएमई को चिप सप्लाई चेन से जोड़ने के लिए वेंडर डवलपमेंट प्रोग्राम एवं इनोवेशन क्लस्टर्स को बढ़ावा देती है, तो यह नीति व्यापक औद्योगिक पारिस्थितिकी की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी। स्थानीय उद्योगों को टेस्टिंग ,पैकेजिंग डिजाइन सेवाओं जैसे क्षेत्रों में प्रोत्साहित किया जाए, तो इससे “वैल्यू रिटेन्शन” राज्य के भीतर ही संभव हो सकेगा, जो दीर्घावधि में आर्थिक आत्मनिर्भरता को बल देगा। यह परिवर्तन मात्र औद्योगिक नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक भी है ,एक ऐसा परिवर्तन जो दर्शाता है कि मरुधरा अब रेत का नहीं, बल्कि ‘डेटा और डिज़ाइन’ का प्रदेश बनने जा रहा है।

🤛 चुनौतियां और सरकार की तैयारी

सेमीकंडक्टर उद्योग की सबसे बड़ी जरूरत निर्बाध बिजली और स्वच्छ पानी है। मरुधरा में पानी हमेशा से एक चुनौती रहा है, लेकिन नीति में निर्बाध रूप से चौबीस घंटे पावर एवं साथ आवश्यक असीमित जल वितरण की उपलब्धता की गारंटी देकर सरकार ने निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता को दूर करने का प्रयास किया है। साथ ही, सात साल तक बिजली शुल्क में सौ प्रतिशत छूट और स्टांप ड्यूटी में रियायत जैसे प्रावधान राजस्थान को गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों के मुकाबले एक आकर्षक विकल्प बनाते हैं।भजनलाल सरकार की यह पहल राजस्थान को उपभोक्ता राज्य ‘कंज्यूमर स्टेट’ से उत्पादक राज्य ‘प्रोड्यूसर स्टेट’ में रूपांतरित करने की दिशा में एक मील का पत्थर है। ‘डबल इंजन’ सरकार का यह बेहतरीन गठजोड़ ,जहाँ केंद्र फंड और विजन दे रहा है एवं राज्य इंफ्रास्ट्रक्चर और पॉलिसी सहयोग दे रहा है जो कि निश्चित रूप से बहुत बड़ी सफलता का आयाम आने वाले वर्षों में हो सकता है । पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट डॉ नयन प्रकाश गांधी का मानना है कि यदि इस नीति का क्रियान्वयन उसी उत्साह से किया गया जिस उत्साह से इसकी घोषणा की गई है, तो वह दिन दूर नहीं जब दुनिया के किसी गैजेट में लगी चिप पर गर्व से लिखा होगा,”मेड इन राजस्थान”। यह मरुधरा के ‘सिलिकॉन धरा’ में बदलने की शुरुआत है।

डॉ.नयन प्रकाश गांधी पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट

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