Tuesday, June 2, 2026
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मोदीजी के नेतृत्व में भारत आर्थिक मोर्चे पर मजबूत – अरविन्द सिसोदिया 

कोटा । राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया ने भारत सरकार की वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा बजट-पूर्व प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ” गत वर्ष से पूरी दुनिया एक प्रकार के अपरोक्ष आर्थिक विश्वयुद्ध से ग्रस्त है। आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था टैरिफ युद्ध, आर्थिक राष्ट्रवाद और भू – राजनीतिक तनाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूती, स्थिरता और आत्मविश्वास के रूप में देशवासियों के साहस को दृढ़ करता है।”

सिसोदिया नें कहा कि ” पूरी दुनिया अस्थिरता और अंध चुनौतीयों के दौर में है, ऐसे में प्रधानमंत्री मोदीजी का कुशल नेतृत्व, संयम, समन्वय और बदलते तौर तरीकों के बीच कुटनीतिक कुशलता, भारत को एक आर्थिक ताकत के रूप में स्थापित कर रही है। ”

सिसोदिया ने कहा कि ” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गंभीर, निर्णायक और दूरदर्शी नेतृत्व में एनडीए सरकार ने भारत की विकास रणनीति को घरेलू मांग आधारित बनाया है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार भारत की जीडीपी का बड़ा हिस्सा आंतरिक खपत से आता है, जिससे बाहरी व्यापारिक झटकों का प्रभाव सीमित रहता है। आत्मनिर्भर भारत की सोच ने उत्पादन, उपभोग और निवेश के बीच संतुलन स्थापित कर देश की आर्थिक नींव को और अधिक मजबूत किया है।”

सिसोदिया ने कहा कि ” अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियों और वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत सुरक्षित बनी हुई है। यह नीतिगत स्पष्टता, दीर्घकालिक दृष्टि और सशक्त आर्थिक प्रबंधन का प्रतिफल है, जिसने भारत को वैश्विक अस्थिरता के बीच स्थिर बनाए रखा है।”

सिसोदिया ने कहा कि ” प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में हो रहे बदलावों के बीच लचीलापन और वैकल्पिक रणनीतियों के साथ भारत के लिए नए अवसर सृजित हुए हैं। विदेशी कंपनियाँ भारत को निवेश के लिए एक विश्वसनीय और उपयुक्त स्थान के रूप में देख रही हैं। भारत का 701.4 अरब डॉलर का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर आर्थिक नीतियाँ इस विश्वास को और सुदृढ़ करती हैं।”

सिसोदिया ने कहा कि ” महंगाई पर नियंत्रण, मजबूत बैंकिंग प्रणाली और समावेशी विकास भारत की आर्थिक मजबूती के प्रमुख स्तंभ हैं। वहीं 1.7 प्रतिशत की नियंत्रित मुद्रास्फीति, 7.4 प्रतिशत की अनुमानित विकास दर, बैंकों के घटते एनपीए और व्यापक वित्तीय समावेशन यह स्पष्ट दर्शाते हैं कि भारत वैश्विक संकटों और चुनौतीओं को भी अवसर में बदलते हुए विश्व अर्थव्यवस्था में स्थिरता की धुरी के रूप में अपनी भूमिका को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है।”

 

 

 

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