नई दिल्ली।लाल किला मैदान में आयोजित 25वें भारत पर्व के अवसर पर भारतीय संस्कृति की जीवंत और रंगीन झलक देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में भारत सरकार का प्रमुख प्रकाशन विभाग (प्रकाशन प्रभाग/डीपीडी) सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के मंडप में आगंतुकों को भारतीय इतिहास, संस्कृति और विचार परंपरा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।
वर्ष 1941 से निरंतर योगदान दे रहा डीपीडी, भारत पर्व की भावना—भारत की सर्वश्रेष्ठता का उत्सव—के अनुरूप प्रामाणिक ज्ञान की मजबूत आधारशिला के रूप में कार्य कर रहा है। मंडप में भारतीय इतिहास, संस्कृति, साहित्य, राष्ट्र निर्माण और विकासात्मक कार्यों से जुड़े प्रकाशनों के साथ-साथ माननीय राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के चयनित भाषणों का समृद्ध और सुविचारित संग्रह प्रस्तुत किया गया है।
प्रामाणिकता की आठ दशकों से अधिक पुरानी विरासत
आठ दशक से भी अधिक समय से प्रकाशन के क्षेत्र में विश्वसनीयता का प्रतीक रहा डीपीडी, अपनी सटीक और प्रामाणिक सामग्री के लिए जाना जाता है। स्टॉल पर आगंतुकों को विभिन्न भारतीय भाषाओं में पुस्तकों की व्यापक श्रृंखला देखने को मिल रही है, जिनमें प्रमुख रूप से—
गांधीवादी साहित्य: महात्मा गांधी के जीवन, विचार और दर्शन पर आधारित पुस्तकें
राष्ट्रीय धरोहर एवं संस्कृति: भारतीय परंपराओं, कला और इतिहास पर उच्च गुणवत्ता के ग्रंथ
जीवनियां: स्वतंत्रता सेनानियों, राष्ट्रीय नायकों और आधुनिक भारत के शिल्पकारों की प्रेरक कहानियां
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: भारत की आधुनिक उपलब्धियों, पर्यावरण और नवाचार पर सुलभ साहित्य
लोकप्रिय पत्रिकाओं और संदर्भ पुस्तकों का विशेष आकर्षण
डीपीडी के स्टॉल पर विभाग की बहुप्रशंसित पत्रिकाएं भी प्रदर्शित की गई हैं, जो दशकों से विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के लिए मार्गदर्शक रही हैं—
योजना (सामाजिक-आर्थिक विषय), कुरुक्षेत्र (ग्रामीण विकास), आजकल (साहित्य व संस्कृति) और बाल भारती (बच्चों की लोकप्रिय पत्रिका)
नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए रोजगार समाचार / एम्प्लॉयमेंट न्यूज के नवीनतम अंक
सरकार की प्रतिष्ठित वार्षिक संदर्भ पुस्तक ‘भारत वर्ष पुस्तिका’, जो राष्ट्र की प्रगति का व्यापक चित्र प्रस्तुत करती है
विशेष छूट और समय
छात्रों एवं पुस्तक प्रेमियों को प्रामाणिक भारतीय साहित्य से जोड़ने के उद्देश्य से डीपीडी स्टॉल पर विशेष छूट भी दी जा रही है।
डीपीडी का यह स्टॉल 31 जनवरी 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से रात 9 बजे तक आम जनता के लिए खुला रहेगा।
भारत पर्व के इस ज्ञान उत्सव में डीपीडी का मंडप लिखित शब्द की शक्ति के माध्यम से भारत को फिर से जानने और समझने का अनूठा अवसर प्रदान कर रहा है—जहां हर पुस्तक भारत की चिरस्थायी विरासत की साक्षी है।






