नई दिल्ली/आधार विश्व की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली बन चुकी है। देश में करीब 134 करोड़ सक्रिय आधार धारक हैं और अब तक 16,000 करोड़ से अधिक प्रमाणीकरण लेनदेन सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं।
आधार जारी करने वाली संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार संख्या धारकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को लेकर व्यापक और सख्त इंतज़ाम किए हैं।
UIDAI ने अपने डेटाबेस की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय (मल्टी-लेयर) सुरक्षा प्रणाली लागू की है। इसके साथ ही सिस्टम की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर समीक्षा और साइबर ऑडिट किया जाता है। डेटा के संचरण और भंडारण के दौरान सुरक्षा के लिए उन्नत एन्क्रिप्शन तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
UIDAI की सूचना सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली (ISMS) को STQC द्वारा ISO 27001:2022 प्रमाणन प्राप्त है। इसके अलावा, UIDAI को ISO/IEC 27701:2019 (गोपनीयता सूचना प्रबंधन प्रणाली) का प्रमाणन भी मिला हुआ है।
UIDAI को एक संरक्षित प्रणाली (Protected System) घोषित किया गया है। इसके चलते राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र (NCIIPC) UIDAI को साइबर सुरक्षा से जुड़ी नियमित सलाह प्रदान करता है, ताकि प्रणाली हर स्तर पर सुरक्षित बनी रहे।
आधार प्रणाली के लिए शासन, जोखिम, अनुपालन और प्रदर्शन (GRCP) ढांचा भी तैयार किया गया है। इसके अनुपालन की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र लेखापरीक्षा एजेंसी नियुक्त की गई है, जो UIDAI एप्लिकेशनों का लगातार साइबर सुरक्षा ऑडिट करती है। इस ऑडिट में स्टैटिक एप्लिकेशन सिक्योरिटी टेस्टिंग (SAST) और डायनेमिक एप्लिकेशन सिक्योरिटी टेस्टिंग (DAST) शामिल हैं।
सरकार ने साफ किया है कि अब तक UIDAI के डेटाबेस से आधार कार्ड धारकों के डेटा में किसी भी प्रकार की सेंधमारी नहीं हुई है। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 17 दिसंबर 2025 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।






