जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी और श्री गोविंददेव गिरी ने मंगलवार को यहां कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान में आयोजित एक गरिमामय समारोह में “इंडोनेशिया में हिन्दू पुनरुत्थान” पुस्तक का विधिवत विमोचन किया। यह पुस्तक लेखवा श्री रविकुमार अय्यर द्वारा इंडोनेशिया में सनातन चेतना के अद्भुत पुनर्जागरण पर आधारित एक शोधपरक एवं भावनात्मक प्रस्तुति है।
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सनातन न किसी पर पता है, न किसी को डरा कर बुलाता है। यह प्रकाश बनकर खड़ा रहता है जो खोजे, वह उसी में मिल जाए, जो देखें, यह उसी में की जाए। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक शोध एवं चेतना के साथ सनातन का भविष्य है। खोए हुए माध्यात्मिक संतुलन की ज्योति हैं एवं हमें पाद दिलाती है कि सनातन कोई प्रचार की वस्तु नहीं, यह आत्मा की आआंतरिक पुकार है। इंडोनेशिया में लाखों लोगों का सनातन की गोर लौटना कोई घटना नहीं, यह चेतना की वापसी है।
देवनानी ने कहा कि प्रत्येक घर में रामायण और गीता होनी चाहिए साथ ही घर के सभी सदस्य संध्या आरती एक साथ करें। उन्होंने कहा कि सनातन के लिए लिए और मानवीय कर्तव्यों को गीता और रामायण से समझे। इससे आपसाद और आत्महत्या जैसी प्रवृत्तियां स्वतः समाप्त हो जाएगी।
समारोह में गोविंद देव गिरी ने कहा कि पुस्तक का प्रकाशन जनअभिनंदनीय एवं ऐतिहासिक कार्य है। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में भारत को देखा जा सकता है, बाली में रोज रामलीला होती है। 5 अगस्त का दिन पावन दिवस है आज ही के दिन अयोध्या में भूमि पूजन हुआ था। उन्होंने कहा भारत ने अपनी अस्मिता और एकरा की पहचान लिया है और भारत की प्रगति करने से अब कोई नहीं रोक सकता।
देवनानी ने किया है ऐतिहासिक कार्य गिरी- गिरी ने कहा कि राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने महत्वपूर्ण कार्य किया है। देवनानी ने इतिहास को सही करने का प्रयास किया है। उनका योगदान अभूतपूर्व है।पुस्तक के लेखक रवि कुमार अम्बर ने कहा कि इंडोनेशिया में मां सरस्वती की विशाल एवं अद्भुत प्रतिमा है जहा तीन बच्चे माँ के चरणों में बैठकर अध्ययन कर रहे हैं। जो विश्व के विभिन्न देशों के प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पूरा विश्व पूर्वतों की ओर जाने की होड़ में लगा हुआ है। विश्व में सनातन की पताका फैल रही है, अब समय आ गया है प्रतीक व्यक्ति भारत माता की सेवा की पहल करें उन्होंने बताया कि पूरोप की सभी भाषाओं की जननी चीक भाषा है और ग्रीक की जननी संस्कृत भाषा है।
रमेश अग्रवाल ने कहा कि वैभवशाली समाज के निर्माण के लिए सामाजिक समरसता का भाव जागृत करना होगा। दैनिक जीवन में स्व का भाव प्रकट करने के लिए कार्य करने होंगे। स्वदेशी का उपयोग करना होगा।






