रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इस समय कुछ ट्रैक ऐसे हैं, जो 160-180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेनों को सपोर्ट कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर ट्रैक इस स्पीड को सह नहीं सकते हैं, इसलिए उनकी मरम्मत करवाई जा रही है, ताकि देशभर में सभी ट्रैकों पर ट्रेनों की स्पीड बढ़ाई जा सके
.नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने ईटीवी भारत को बताया, इस समय कुछ रेल ट्रैक ऐसे हैं, जहां पर स्पीड को घटाया जाता है और उसके बाद ट्रेन की स्पीड बढ़ाई जाती है. इस क्रम में कम-के-कम छह मिनट का अतिरिक्त समय खर्च होता है.
उन्होंने कहा कि जिन सेक्शंस पर ट्रेन की स्पीड बढ़ाई जानी है, वहां पर कई काम होने हैं, जैसे- क्रॉसिंग गेट का हटाया जाना, बेहतर ट्रैक का बिछाया जाना वगैरह-वगैरह.रेलवे द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ट्रैक इन्फ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण के लिए बहुत सारे काम किए जाने हैं. हाई स्पीड ऑपरेशंस के लिए पटरियों को मजबूत करना जरूरी है ताकि उसकी ड्यूरेबिलिटी बनी रहे. सटीक संचार और सुरक्षित ट्रेन परिचालन के लिए उन्नत सिग्नलिंग प्रणालियों का कार्यान्वयन तथा सुरक्षा उपायों की पहल करना शामिल है.रेलवे के अनुसार जब भी हाई स्पीड ट्रेन गुजरती है, तो ट्रैक पर पशु और मानव, दोनों का हस्तक्षेप न हो, सुरक्षा के हिसाब से इसे भी सुनिश्चित किया जाना है.






