ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिये सरकार द्वारा किया जा रहे प्रयास नाकाफ़ी साबित हो रहा है ।इसके पीछे की मंशा यह भी हो सकती ही की इनको लेकर लोगो में जागृती नहीं है।हाड़ौती में कई ऐसे स्थान है जिनको अगर सही तरीके से सार सम्भाल मिले और उनका जीर्णोद्धार करवाया जाये तो यह कोटा को पर्यटन नगरी के रूप में स्थापित कर सकता है।चित्र में नज़र आ रही जगह कोटा थर्मल के रास्ते में सगस जी महाराज के प्राचीन स्थल की है ।किसी समय कोटा में यह जगह अपनी एक पहचान रखती थी और काफ़ी संख्या में लोग यहाँ सगस जी महाराज के दर्शन को आते थे। अदभुत सी दिखने वाले इस स्थान के पीछे एक रियासतकालीन बड़ा तालाब हुआ करता था जिसे थर्मल प्रसाशन ने वहाँ से निकलने वाली राख से भर रखा था।अभी कुछ समय पहले राख की उपयोगिता होने पर थर्मल प्रसाशन ने उसे बेचकर करोड़ो रुपये की आमदनी कर तालाब को फिर से खाली कर दिया है,मगर राख निकलने के बाद तालाब की स्थिति काफ़ी विकट हो गई है जिस पर थर्मल प्रसाशन ध्यान नहीं दे रहा है ।स्थानिय समुदाय के लोग व इंटेक कोटा द्वारा तालाब के जीर्णोद्धार के लिये थर्मल प्रसाशन से आग्रह किया जा चुका है पर लगता है की सरकार और जनप्रतिनिधिओ की उदासीनता के चलते क्या फिर कभी यह स्थान अपने मूल स्वरूप को वापस पा सकेगा ?-
-एकता धारीवाल






