# करवा चौथ के उपलक्ष पर
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• तुम दिखते हो चाँद सितारों में *
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रहे आस्था हरदम,
तुम दिखते हो चाँद सितारों में ।
सौलह श्रृंगार करें रमणी,
दर्शन की लगे कतारों में ।।
अर्ध्य चढ़ाने को आतुर,
आ जाओ मस्त बहारों में ।
इतना इम्तिहाँ लो मयंक न,
दया बनो बेचारों में ।।
माँ के दर पर कुछ पाने को,
आस लगाऐं कब से हैं ।
ब्रह्म-मुहूर्त से बिना चाय-पानी के,
रह रहीं कब से है ।।
तप-तेज-भक्ति के दम पर वो,
आशीष माँगती कब से है ।
इक सुहाग के जीवन की जो,
भीख़ माँगती कब से है ।।
शशि लाओ तुम्हीं नव-जीवन,
माँ की आँख के तारों में ।
रहे आस्था हरदम,
तुम दिखते हो चाँद सितारों में ।।
माँ चौथ के वरद्हस्त से,
मिली सिद्धियाँ सारी हैं ।
पति-व्रत ही ढाल जिनका,
वो तलवार दुधारी हैं ।।
चंदा दीखे तब उस पर वो,
हो जायें बलिहारी हैं ।
प्रियतम दस बार करवे से,
पिला रहे फिर वारि हैं ।।
इसके बाद फिर व्रत खोलते,
अपने ही संसारों में ।
रहे आस्था हरदम,
तुम दिखते हो चाँद सितारों में ।।
सुहागिनों की श्रद्धा का,
सबसे यह पावन व्रत उत्तम ।
करें मनोरथ पूर्ण मातु शक्ति,
वर देती सर्वोत्तम ।।
बरसाऐं खुशियाँ हर पल वो,
रफ़ा-दफ़ा करती हर ग़म ।
करें उजाला अन्तर्मन में,
नाश करें अन्तर का तम ।।
चरणों की मंगल-भभूति से,
नया-जन्म मँझधारों में ।
रहे आस्था हरदम,
तुम दिखते हो चाँद सितारों में ।।
रहे आस्था हरदम,
तुम दिखते हो चाँद सितारों में ।
सौलह श्रृंगार करें रमणी,
दर्शन की लगे कतारों में ।।
# स्वरचित/मौलिक/सर्वाधिकार सुरक्षित
# बृजेन्द्र सिंह झाला”पुखराज”,
कोटा (राजस्थान)






