Saturday, August 29, 2026
Screenshot_2026-02-16-14-04-33-20_6012fa4d4ddec268fc5c7112cbb265e7
previous arrow
next arrow

Top 5 This Week

Related Posts

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस आज

चिकित्सक दिवस डॉ. बिधान चंद्र रॉय की पावन स्मृति में मनाया जाता है. डॉ. बिधान चंद्र रॉय का जन्म 1 जुलाई 1882 को बिहार के पटना जिले के बांकीपुर गांव में हुआ था। उनके पिता, प्रभात चंद्र रॉय, एक सरकारी कर्मचारी थे और उनकी माता, अघोरकुमारी देवी, एक धार्मिक महिला थीं। डॉ. रॉय का प्रारंभिक शिक्षा पटना में हुई और उन्होंने कलकत्ता मेडिकल कॉलेज से एम.बी.बी.एस. की डिग्री प्राप्त की। अपनी उच्च शिक्षा के लिए, वे इंग्लैंड गए और वहाँ मात्र दो साल में एम.आर.सी.पी. और एफ.आर.सी.एस. की उपाधियाँ हासिल कीं।

 

डॉ. रॉय 1911 में भारत लौटे और उन्होंने चिकित्सा सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देना शुरू किया। वे एक प्रतिष्ठित चिकित्सक बने और उनके प्रयासों से कोलकाता में कई महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थान स्थापित हुए। इनमें जादवपुर टी.बी. हॉस्पिटल, चित्तरंजन सेवा सदन, और चित्तरंजन कैंसर अस्पताल शामिल हैं।

 

डॉ. बिधान चंद्र रॉय ने चिकित्सा के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान देने के साथ-साथ राजनीतिक जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे 1948 से 1962 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे और इस दौरान उन्होंने राज्य के पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई सुधार किए और पश्चिम बंगाल को विकास के पथ पर अग्रसर किया।

 

डॉ. रॉय की महानता सिर्फ उनके चिकित्सा और राजनीतिक जीवन तक सीमित नहीं थी। वे महात्मा गांधी के निजी चिकित्सक थे और पंडित जवाहरलाल नेहरू के भी करीबी मित्र थे। 1961 में, उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

 

डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जन्म और पुण्यतिथि, 1 जुलाई, को भारत में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन उन सभी चिकित्सकों को सम्मानित करने का अवसर है जो समाज की सेवा में समर्पित हैं और जन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं।

 

डॉ. रॉय का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी समर्पण, सेवा और मानवता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता हमें सिखाती है कि किस प्रकार एक व्यक्ति अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर समाज के लिए असीम योगदान दे सकता है। उनकी अद्वितीय विरासत हमें यह भी याद दिलाती है कि सच्चे नेता और सच्चे चिकित्सक समाज के स्तंभ होते हैं जो अपने कर्म और समर्पण से समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं।

 

 

डॉ सुरेश पाण्डेय डॉ विदुषी शर्मा, सुवि नेत्र चिकित्सालय, कोटा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles