Saturday, October 17, 2026
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कोटा के राष्ट्रीय रंगमंच पर माल्यवंत के किरदार में नजर आएंगे सोहन सिंह चौहान, 10 वर्षों से रामलीला से जुड़े हैं रंगकर्मी

कोटा के राष्ट्रीय रंगमंच पर माल्यवंत के किरदार में नजर आएंगे सोहन सिंह चौहान, 10 वर्षों से रामलीला से जुड़े हैं रंगकर्मी

डेढ़ माह तक गोदावरी धाम पर चलता है रामलीला का अभ्यास, 70 कलाकारों की टीम मिलकर करती है मंचन

कोटा। भगवान श्रीराम की लीला का मंचन भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का सशक्त माध्यम है। कोटा में राघवेन्द्र कला संस्थान की ओर से आयोजित रामलीला में इस बार रंगकर्मी सोहन सिंह चौहान रावण के नाना माल्यवंत की भूमिका में नजर आएंगे। सोहन सिंह पिछले 10 वर्षों से संस्थान की रामलीला से जुड़े हुए हैं और बीते पांच वर्षों से लगातार माल्यवंत का किरदार निभा रहे हैं।

सोहन सिंह चौहान ने बताया कि माल्यवंत रावण के नाना थे। इस पात्र के माध्यम से रामलीला में रावण के परिवार और उसके आसपास की परिस्थितियों से जुड़े प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने कहा कि रामलीला में अभिनय करना उनके लिए केवल एक भूमिका निभाना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर है।

70 कलाकारों की टीम, डेढ़ माह तक होता है अभ्यास

राघवेन्द्र कला संस्थान की रामलीला में करीब 70 कलाकार भाग लेते हैं। मंचन की तैयारी के लिए कलाकार लगभग डेढ़ माह तक गोदावरी धाम पर नियमित अभ्यास करते हैं। यह अभ्यास प्रतिदिन रात 8:30 बजे से 11 बजे तक चलता है। निर्देशक ब्रजराज गौतम के सानिध्य में कलाकार संवाद, अभिनय और रामायण की चौपाइयों का अभ्यास करते हैं।

सोहन सिंह चौहान के अनुसार, संस्थान में सभी कलाकार एक परिवार की तरह रहते हैं। निर्देशक ब्रजराज गौतम प्रत्येक कलाकार को प्रेमपूर्वक उसकी भूमिका समझाते हैं और संवादों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए मार्गदर्शन देते हैं। रामलीला के संवाद और चौपाइयों को तैयार करने से लेकर मंच पर प्रस्तुति तक सभी कलाकार मिलकर काम करते हैं।

वैभव गौतम श्रीराम और अश्वत्थामा दाधीच निभाते हैं रावण की भूमिका

संस्थान की रामलीला में वैभव गौतम भगवान श्रीराम की भूमिका निभाते हैं, जबकि अश्वत्थामा दाधीच रावण का किरदार प्रस्तुत करते हैं। अलग-अलग पात्रों के माध्यम से कलाकार रामायण के प्रसंगों को जीवंत बनाते हैं और दर्शकों तक मर्यादा, धर्म तथा आदर्श जीवन के संदेश पहुंचाते हैं।

करीब पांच दशक से रामलीला की परंपरा

राघवेन्द्र कला संस्थान लगभग पांच दशकों से रामलीला के मंचन की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। संस्थान का स्थापना दिवस 12 अगस्त को मनाया जाता है। संस्थान से कोटा शहर के विभिन्न क्षेत्रों के कलाकार जुड़े हुए हैं, जो अपनी कला और अभिनय के माध्यम से इस सांस्कृतिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं।

संस्थान के अध्यक्ष भुवनेश जोशी और महासचिव रंगलाल मेहरा के मार्गदर्शन में आयोजन की व्यवस्थाएं की जाती हैं। निर्देशक ब्रजराज गौतम के सानिध्य में कलाकार रामलीला की तैयारियों को अंतिम रूप देते हैं। राष्ट्रीय रंगमंच, कोटा में आयोजित होने वाली रामलीला प्रतिदिन रात्रि 8:30 बजे से आरंभ होती है।

रंगमंच के साथ भारतीय ज्योतिष का भी अध्ययन

सोहन सिंह चौहान रंगकर्मी होने के साथ-साथ भारतीय ज्योतिष के विद्यार्थी भी हैं। वे पिछले 15 वर्षों से भारतीय ज्योतिष का अध्ययन कर रहे हैं। रंगमंच और ज्योतिष के प्रति उनकी रुचि उनके व्यक्तित्व के दो अलग-अलग पक्षों को दर्शाती है।

सोहन सिंह चौहान का कहना है कि रामलीला से जुड़कर उन्हें अभिनय के साथ भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और रामायण के पात्रों को करीब से समझने का अवसर मिला है। माल्यवंत की भूमिका निभाते हुए वे इस परंपरा का हिस्सा बनने पर गर्व महसूस करते हैं।

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