Wednesday, September 30, 2026
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गांधी जी की अस्थि विसर्जन स्थली को मिले राष्ट्रीय स्मारक की पहचान

-रामावतार राठौर

कोटा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कोटा से जुड़ी ऐतिहासिक स्मृति को संरक्षित करने की मांग उठी है। समाजसेवी एवं स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय शंभू दयाल जी सक्सेना के शिष्य अरुण भार्गव ने संभागीय आयुक्त, नगर निगम आयुक्त एवं कोटा विकास प्राधिकरण के आयुक्त को पत्र लिखकर महात्मा गांधी की अस्थि विसर्जन से जुड़े ऐतिहासिक शिलालेख को सम्मानजनक स्थान देकर स्मारक के रूप में विकसित करने की मांग की है।

अरुण भार्गव ने बताया कि वर्ष 1948 में महात्मा गांधी की अस्थियां कोटा लाई गई थीं। चंबल नदी के सिंघाड़ा घाट पर तत्कालीन कोटा नगर पालिका के प्रथम अध्यक्ष एवं स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय शंभू दयाल जी सक्सेना के नेतृत्व में हजारों नागरिकों की उपस्थिति में राष्ट्रपिता की अस्थियों का विसर्जन किया गया था। इस ऐतिहासिक घटना की स्मृति में वहां शिलालेख स्थापित किया गया था।

‘यह पत्थर नहीं, कोटा के इतिहास की अमूल्य धरोहर है’

भार्गव ने कहा कि यह शिलालेख महज पत्थर पर लिखे कुछ शब्द नहीं हैं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन, महात्मा गांधी और कोटा के ऐतिहासिक संबंध का जीवंत दस्तावेज है। वर्षों से लोग इस स्थान पर पहुंचकर श्रद्धा-सुमन अर्पित करते रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शिलालेख को आज तक वह सम्मानजनक स्थान और पहचान नहीं मिल सकी, जिसका वह हकदार है।

उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस ऐतिहासिक धरोहर को उपेक्षित रखने के बजाय इसे कोटा के प्रमुख ऐतिहासिक एवं दर्शनीय स्थलों में शामिल करने की पहल करनी चाहिए।हॉल बनाकर शिलालेख सुरक्षित करने की मांग

 

 

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