जितेंद्र कुमार शर्मा
बारां /राजस्थान के बारां जिले की शाहाबाद तहसील अंतर्गत ग्राम मुंडियर में NH-27 के समीप स्थित खसरा नंबर 23 पर पिछले कई दिनों से रात के अंधेरे में JCB मशीनों के माध्यम से सैकड़ों हरे-भरे पेड़ों को जड़ से उखाड़े जाने का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह अवैध कटाई सुनियोजित तरीके से की जा रही है और संबंधित राजस्व अधिकारियों को सूचना देने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
शाहबाद घाटी संघर्ष समिति बारां के सदस्य जीतू ओझा के अनुसार खसरा नंबर 23 की भूमि पर 20–30 वर्ष पुराने नीम, बबूल, पलास एवं अन्य प्रजातियों के सैकड़ों पेड़ मौजूद थे। बीते कई दिनों से रात लगभग 10 बजे के बाद JCB मशीनें लगाकर इन हरे पेड़ों को काटा और उखाड़ा गया। दिन में कोई गतिविधि न होना और केवल रात में भारी मशीनरी का उपयोग करना, इस कटाई को संदिग्ध और अवैध सिद्ध करता है।
बताया जा रहा है कि संबंधित भूमि खातेदारी है, परंतु वन एवं पर्यावरण संबंधी कानूनों के अनुसार खातेदारी भूमि पर भी वन विभाग एवं सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना हरे पेड़ों की कटाई प्रतिबंधित है। ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि यदि कटाई वैध है, तो उसे दिन के उजाले में क्यों नहीं किया जा रहा?
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने लगभग पाँच दिन पूर्व ही पटवारी हल्का मुंडियर को फोन द्वारा अवैध कटाई की सूचना दी थी। इसके बावजूद न तो मौके का निरीक्षण किया गया और न ही कटाई रोकने हेतु कोई कदम उठाया गया। इस निष्क्रियता से ग्रामीणों में आक्रोश है और मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीणों ने एक स्थानीय व्यक्ति के कटाई के पीछे होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में उनकी कथित पकड़ के कारण मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों द्वारा पूरे मामले की सत्यता से जांच की मांग की गई है।
कुछ ग्रामीणों, जिनमें माणकचन्द शामिल हैं, ने आरोप लगाया कि इस मामले पर स्थानीय स्तर पर खबरें सामने नहीं आ रहीं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावशाली व्यक्तियों के कारण मीडिया कवरेज प्रभावित हो रही है। उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, धारा 91: सरकारी व गैर-सरकारी भूमि पर अवैध वृक्ष कटाई दंडनीय अपराध है ।वन संरक्षण अधिनियम: 10 से अधिक पेड़ काटने के लिए SDM एवं वन विभाग की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार सूर्यास्त के बाद पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध।
शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां के जीतू ओझा एवं सदस्यों ने मांग की कि अवैध कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।स्वतंत्र व उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।दोषियों (चाहे वे किसी भी पद या प्रभाव में हों) पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
कटे हुए पेड़ों का आकलन कर पर्यावरणीय क्षति की भरपाई कराई जाए।भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु निगरानी व पारदर्शी तंत्र स्थापित किया जाये।





