रोटेदा/बूंदी/श्री लक्ष्मी नाथ मन्दिर रोटेदा मे 11 दिवसीय श्री पुरषोत्तम मास की संगीतमय कथा में तीसरे दिन कथा वाचक कवि पंडित देवकी दर्पण ने चौवदह अध्याय तक की कथा मे
वनवास काल के दौरान भगवान श्री कृष्ण का पाण्डवों से वन मे मिलने जाना व द्वारिकाधीश द्वारा पुरषोत्तम मास स्नान व्रत का महत्व समझा कर अधिक मास सेवन करने की प्रेरणा देना । द्रोपदी के पूर्व जन्म की कथा पाण्डव विवाह और हैहय देश का सत्य पराक्रमी राजा चित्रधर्मा को दृढधन्वा नाम के, उत्तम संसकारी पुत्र पाने की कथा का सविस्तार वर्णन करते हुये इस प्रसंग से कुटुम्ब प्रबोधन को जोड़ते हुये कवि पंडित दर्पण ने कहा-परिवार समाज की सबसे छोटी इकाई है जिसे खून के रिस्ते कहते है वही संयुक्त परिवार मे आध्यात्मिक विचारों से पोषित हो वसुधैव कुटुम्बकम की यात्रा करती है। ऋग्वेद मे परिवार को एक आनन्द स्थल के रूप मे देखा गया है
संयुक्त परिवार संस्कार सहित ऐकता अखण्डता और आध्यात्मिक दर्शन की पाठशाला रही है, आज परिवार टूटते जा रहे है। आज एकल परीवार होने से उसे अपने पराये तक का बोध नही है। आज मानव भाई को शत्रु और शत्रु से, भाई जेसा व्यवहार कर स्वयं को धोका देने मे लगा है।अराजक तत्वों द्वारा एकल परिवारों को मांसिक वेंदना,आर्थिक तंगी सहित धर्म परिवर्तन का शिकार बनाया जारहा है।






