Saturday, July 25, 2026
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ग़ज़ल-तो क्या हुआ हम खामोश थे

तो क्या हुआ,

तो क्या हुआ,हम खामोश थे

तो क्या हुआ,

क्या हुआ,जो कोई बेआबरू कर रहा था किसी को,

तो क्या हुआ,

जो पड़ोस के घर से आने वाली सिसकियाँ

बंद है अब,

तो क्या हुआ ,

एक मासूम सी बच्ची को नोंच डाला

हैवानियत के दरिंदों ने ,

तो क्या हुआ ,

बूढ़ी माँ को कोई सरेराह पीट रहा था

उसकी जायदाद से हिस्से की खातिर ,

तो क्या हुआ ,

किसी की लापरवाही से बीच सड़क पर,

बुझ गया किसी के घर का चिराग ,

तो क्या हुआ,क्या हुआ ………..

 

हम यूं ही मौन रहेंगे, फकत

हम नहीं गुजरे जो इस दर्द संताप से,

बचा हुआ है घर हमारा ,

हम नहीं झुलसे इन लपटों,इस आग से,

या के इंतजार है हमें बिजली गिरने का

जो मिटा डालेगी हमारे वजूद को,

या उन चीत्कारों को सहने का सामर्थ्य

बचे ही ना हमारे पास ,….

इसलिए जरूरी है ;

आज के ऐसे हालातों में तोड़ें अपनी चुप्पी ,

करें विरोध निर्विरोध निडर होकर ,

ताकि सुरक्षित,सहज,सहयोगपूर्ण रहे समाज,

ओर फैली रहे रिश्तों, अपनेपन, मर्यादा की सुगंध चहुंओर |

कृष्ण”राम”पंकज

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