Tuesday, April 28, 2026
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विकसित राजस्थान @2047’: कोटा की कोचिंग से ग्लोबल इकोनॉमिक हब तक की छलांग

लेखक: प्रतीक गोयल

(अध्यक्ष, राजीव गांधी नगर ऑक्सीजोन विकास समिति , कोटा )

कोटा / दशकों तक ‘शिक्षा नगरी’ के रूप में विख्यात कोटा अब अपनी पहचान की सीमाओं को लांघकर राजस्थान की भविष्यगामी अर्थव्यवस्था के एक शक्तिशाली ‘ग्रोथ इंजन’ के रूप में उभर रहा है। ‘विकसित राजस्थान @2047’ का लक्ष्य केवल आर्थिक आँकड़ों की वृद्धि नहीं, बल्कि कोटा जैसे शहरों का वह कायाकल्प है, जहाँ शिक्षा, उद्योग, नवाचार और पर्यावरण का अद्भुत सामंजस्य होगा।

कनेक्टिविटी: 

विकास की नई जीवनरेखा

किसी भी वैश्विक शहर की पहली शर्त सुदृढ़ कनेक्टिविटी है। कोटा आज दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जुड़कर देश की आर्थिक धमनियों का हिस्सा बन चुका है। मुकुंदरा की पहाड़ियों में निर्मित टनल और प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट कोटा को सीधे अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करेंगे। NH-52 और NH-27 के जंक्शन के रूप में यह शहर उत्तर और पश्चिम भारत के बीच एक रणनीतिक लॉजिस्टिक्स हब बनने की ओर अग्रसर है।

प्रशासनिक क्रांति और रणनीतिक विस्तार:

यूआईटी (UIT) का कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) में रूपांतरण एक प्रशासनिक मील का पत्थर है। कैथून और केशवरायपाटन तक फैला यह ‘मेट्रोपॉलिटन विस्तार’ निवेश के लिए विशाल ‘लैंड बैंक’ उपलब्ध कराता है। जियो-फेंसिंग और जीआईएस मैपिंग जैसे डिजिटल सुधारों के माध्यम से पारदर्शी प्रशासन और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ अब एक वास्तविकता बन रही है, जो वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करेगी। इस विज़न को धरातल पर उतारने में कोटा-बूंदी के सांसद एवं माननीय लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी सतत रूप से सक्रिय और प्रयासरत हैं।

बुनियादी ढांचा और हरित अर्थव्यवस्था:

चंबल रिवरफ्रंट और ऑक्सीजन सिटी पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स ने यह सिद्ध कर दिया है कि बुनियादी ढांचा केवल कंक्रीट का जाल नहीं, बल्कि सौंदर्य और पारिस्थितिकी का मेल हो सकता है। 2047 के कोटा में ई-बसें और सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग इसे एक ‘इको-स्मार्ट सिटी’ बनाएगा। चंबल के जल संसाधनों का संरक्षण करते हुए कोटा सतत विकास का वैश्विक मॉडल बनेगा।

ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था और नवाचार:

कोटा की अर्थव्यवस्था अब केवल हॉस्टल और मेस तक सीमित नहीं रहेगी। इसे ‘एजु-टेक और स्टार्टअप हब’ में बदलना होगा। एआई (AI), रोबोटिक्स और डेटा साइंस के केंद्रों के माध्यम से यहाँ का युवा ‘जॉब सीकर’ के बजाय ‘जॉब क्रिएटर’ बनेगा। साथ ही, कोटा डोरिया जैसी पारंपरिक कलाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर नारी शक्ति और सूक्ष्म उद्यमिता को वैश्विक पहचान दी जाएगी।

पर्यटन और सांस्कृतिक गौरव:

हाड़ौती की विरासत—कोटा-बूंदी-झालावाड़ का हेरिटेज सर्किट—विदेशी मुद्रा और स्थानीय रोजगार का बड़ा स्रोत बनेगा। मुकुंदरा में बाघों का संरक्षण और चंबल का रिवरफ्रंट पर्यटन को अर्थव्यवस्था के ‘लीडिंग पार्टनर’ के रूप में स्थापित करेगा।

निष्कर्ष:

‘विकसित राजस्थान @2047’ का मार्ग कोटा की गलियों से होकर गुजरता है। चंबल सा अक्षय जल, युवा मेधा और आधुनिक तकनीक का संगम कोटा को केवल कोचिंग सिटी नहीं, बल्कि नवाचार और निवेश की वैश्विक राजधानी बनाएगा। इस यात्रा में केवल सरकारी प्रयास ही नहीं, बल्कि कोटा के हर नागरिक की भागीदारी अनिवार्य है। यह समय विजन को क्रियान्वयन में बदलने का है, ताकि 2047 का समृद्ध राजस्थान अपनी चमक से पूरी दुनिया को आलोकित कर सके।

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