कोटा। शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज को लेकर गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं का मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्य प्रदेश निवासी महिला रेहाना बी को 24 तारीख की रात सुधा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां तीन दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उनकी मृत्यु हो गई।
परिजनों का आरोप है कि महिला के पास आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने उसे स्वीकार करने से मना कर दिया और इलाज के नाम पर अलग-अलग किस्तों में करीब ₹1,25,000 नकद जमा करवाए। इतना ही नहीं, परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि मृत्यु के बाद भी अस्पताल स्टाफ द्वारा दवाइयां और इंजेक्शन मंगवाए जाते रहे, जो बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाली बात है।
घटना की जानकारी मिलने पर हरपाल सिंह राणा (पूर्व उपाध्यक्ष, गुरु नानक देव सिख कल्याण बोर्ड, राजस्थान सरकार) अपने साथियों के साथ अस्पताल पहुंचे और परिजनों से पूरी जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कड़ा विरोध जताते हुए इस पूरे मामले को गंभीर लापरवाही बताया।
हरपाल राणा ने फोन के माध्यम से कोटा CMHO को भी मामले से अवगत कराया और संबंधित कर्मचारियों व अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि जहां एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की चिरंजीवी योजना के तहत ₹25 लाख तक मुफ्त इलाज की सुविधा दी गई, वहीं केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना के तहत ₹5 लाख तक का इलाज भी मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। यह स्थिति आम जनता के लिए चिंता का विषय है।





