Friday, September 11, 2026
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चौखट-चौखट चूमी है दर-दर ये शीश झुकाया -कृष्ण ‘राम’ पंकज

चौखट-चौखट चूमी है ,दर दर ये शीश झुकाया है ,

बड़ी मन्नतों बाद मुझे ,मेरी माँ ने पाया है ,

जिसके सिर पे ममता की छैया ,कब किससे वो हारा है ,

सबसे पहले माँ की ममता ,बाद मे ये जग सारा है ………..

खुद रहकर के भूखा उसने, पहले मुझे खिलाया है ,

परहित सेवा धर्म हो अपना ,ये ही पाठ पढ़ाया है ,

खुद को उजाड़ कर उसने जीवन मेरा संवारा है,

सबसे पहले माँ की ममता, बाद मे ये जग सारा है …………

मेरी खुशी की खातिर हर पल रहती है तैयार खड़ी,

मेरे चेहरे पे ना हो शिकन वो देखती है घड़ी घड़ी,

किसी भी सूरत में दु:ख मेरा उसको नहीं गंवारा है,

सबसे पहले माँ की ममता, बाद मे ये जग सारा है …………

मुझको मिली ममता की छाँव, हे ईश्वर एहसान तेरा ,

माँ के रूप में पाया मैंने हे प्रभु वरदान तेरा ,

तू तो तीनों लोकों का स्वामी, मेरा वो ही एक सहारा है,

सबसे पहले माँ की ममता, बाद मे ये जग सारा है …………

स्वरचित : कृष्ण “राम” पंकज

           कोटा (राज.)

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