Friday, August 28, 2026
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महाराणा का प्रताप -कविता स्वर्गीय मदनदास जी महाराज (सांगोद वाले)

सिर ना झुका पगड़ी न झुकी

नहीं लाज झुकी थी राणा की

मेवाड़ी पगड़ी अमर बनी

चित चरित्र का नित्य ध्यान रहा

तलवार चमकती वीरों की

चेतक सा घोड़ा आज कहां

तप त्याग तपस्या गांठ बंधी

नस -नस में वीर भावना थी

शक्ति सिंह बंधु बिछुड़ा

स्वीकार दासता अकबर की

पर वीर शिरोमणि अटल रहा

प्रण टल न सका राणा का

सूर्यवंश का सूर्य उदित हो

समर भूमि में आन खड़ा

सुन पावन कथा सुनने की

 कविता रचनाकार स्वर्गीय -संत कवि मदनदास जी महाराज (सांगोद वाले)

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