डॉ. नयन प्रकाश गांधी✍️
कोटा घटना: शहरी नियमन और निर्माण सुरक्षा सुदृढ़ीकरण हेतु तात्कालिक नीति कदम
मुख्यमंत्री को शहरी नियमन और निर्माण सुरक्षा सुदृढ़ीकरण हेतु गांधी ने आगामी मानवीय जन सुरक्षा एवं स्टूडेंट हितार्थ पॉलिसी ड्राफ्ट तैयार कर ईमेल प्रेषित किया

कोटा में हाल ही में एक व्यावसायिक तीन मंजिला इमारत के अचानक ढहने की घटना केवल एक स्थानीय दुर्घटना नहीं, बल्कि राजस्थान के शहरी नियमन तंत्र के लिए विचारणीय विषय है । प्रारंभिक तथ्यों से यह सामने आया है कि नजदीकी जुड़ी इमारत के सतत् चल रहे निर्माण कार्य में क्या नगर निगम की अनुमति, तकनीकी स्वीकृति और गुणवत्ता नियंत्रण का समुचित पालन नहीं हुआ। हालांकि घटना स्थल ओर आकर स्थानीय मंत्री ,आला अधिकारियों ,पक्ष विपक्ष के जनप्रतिनिधियों सभी ने त्वरित माध्यम से पहुंचकर घटनास्थल पर मौके का जायजा लिया और घायलों को तुरंत अस्पतालों पर पहचाया और बेहतर स्वास्थ्य लाभ की मॉनिटरिंग की जो पूरे कोटा से राष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित इस घटना का सकारात्मक जन हितैषी पहलू इंगित करता है ,की दुख दर्द ,जन हानि में पूरा कोटा मानो एक हो जाता है ,यही है कोटा शिक्षा नगरी की गुणवत्ता पूर्ण वातावरण की पहचान ।
परंतु क्या जो जन हानि हुई उसे हम उन युवा स्टूडेंट के जीवन को पुनः ला पाएंगे कतई नहीं ,परंतु इस घटना से सबक अवश्य लिया जा सकता है कि कोटा शहर नहीं अपितु पूरे राज्य के महत्वपूर्ण शहरों ही नहीं,कस्बों और गांवों में बनी बड़ी इमारतों ,भवनों का गुणवत्ता पूर्ण निरीक्षण हो ,यह पिपलोदी वाली घटना याद दिलाता है जिसमें कई मासूम बच्चों की जान गई थी ,यहाँ भी दो किशोर की हालिया मृत्यु की खबर आई है जो हृदय विदारक है उन माँ पिता के लिए जिन्होंने उनके भविष्य का सपना देखा था ।

इसलिए अचानक कुछ मिनटो में तीन मंजिला भवन का तीव्र गति से ढह जाना उपरोक्त इमारत की नींव का कमजोर ही नहीं ,अपितु भविष्य में ऐसी घटना अन्य न हो के लिए नगर निगम को एक चेतावनी भी देता है कि समय रहते कोटा शिक्षा नगरी के भीड़ भाड़,स्टूडेंट वाले क्षेत्र ,व्यावसायिक भवनों चाहे कोचिंग संस्थान हो या अन्य होटल या मुख्य मार्ग पर स्थित कोई आवासीय आलिशान भवन ,जरूरत है तो सचेत होने की की गुणवत्ता पूर्ण कई दशकों पुरानी या नव निर्माणाधीन इमारतों का गुणवत्ता पूर्ण सिविल तकनीकी निरीक्षण करना ।यह स्थिति बताती है कि वर्तमान व्यवस्था में निर्माण की अनुमति तो दी जाती है, परंतु निर्माण के दौरान नियमित निरीक्षण, चरणबद्ध जाँच और जवाबदेही का अभाव बना रहता है।
भारत सरकार के अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान मुंबई के एलुमनाई कोटा निवासी डॉ नयन प्रकाश गांधी का मानना है कि आज आवश्यकता है कोटा में जो भी अवैध या वैध सर्वप्रथम मानव जन हितार्थ तीन-चार,पांच मंज़िला भवनों का गुणवत्ता पूर्ण निरीक्षण हो ।इस संदर्भ में आवश्यकता है कि जिला स्तर पर कोटा शिक्षा नगरी में ऐसे हादसे फिर न हो उसके लिए शहरी निर्माण सुरक्षा को तात्कालिक नीतिगत प्राथमिकता बनाया जाए।साथ ही कोटा जैसी घटना से सबक लेते हुए राज्यभर में अवैध निर्माण की पहचान, भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक क्षेत्रों में ,महत्वपूर्ण मुख्य मार्गो पर स्थित सभी निर्माणाधीन भवनों का नियमित संरचनात्मक निरीक्षण और नगर निगम अधिकारियों की स्पष्ट जवाबदेही तय करना अनिवार्य हो गया है। यदि निर्माण सुरक्षा को केवल प्रशासनिक निर्देशों तक सीमित रखा गया, तो ऐसी घटनाएँ होती रहेंगी।अब समय है कि स्पष्ट, सख़्त और समयबद्ध शहरी निर्माण सुरक्षा नीति लागू की जाए, जिससे राजस्थान में शहरी विकास केवल तेज़ नहीं, बल्कि सुरक्षित और उत्तरदायी भी बन सके।

कोटा शहर के प्रमुख चौराहों, मुख्य सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर स्थित कई बहुमंज़िला इमारतें,चाहे वे वर्तमान में निर्माणाधीन हों या पूर्व में निर्मित आज भी गुणवत्ता निरीक्षण और संरचनात्मक सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासनिक निगरानी से बाहर प्रतीत होती हैं। विशेष चिंता का विषय यह है कि ऐसी इमारतें घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थित हैं, जहाँ प्रतिदिन हज़ारों नागरिकों की आवाजाही रहती है। यदि इन भवनों का निर्माण मानकों के अनुरूप न हो या समय-समय पर तकनीकी जाँच न की जाए, तो किसी भी क्षण यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।इसीलिए यह आवश्यक है कि नगर निगम कोटा, शहरी विकास विभाग एवं संबंधित तकनीकी अधिकारियों द्वारा मुख्य चौराहों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में स्थित सभी बहुमंज़िला आवासीय व व्यावसायिक इमारतों का अनिवार्य, समयबद्ध और दस्तावेज़-आधारित गुणवत्ता निरीक्षण कराया जाए। यह निरीक्षण केवल औपचारिकता न होकर संरचनात्मक स्थिरता, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और स्वीकृत मानचित्र के अनुपालन पर आधारित हो। मुख्यमंत्री स्तर पर स्पष्ट निर्देश और निगरानी तंत्र के बिना शहरी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती है और कोटा जैसी घटनाएँ यही चेतावनी देती हैं कि अब नीतिगत सख़्ती टालने का समय नहीं है। गांधी का मानना है कि कोटा शहर भारत का एक प्रमुख कोचिंग और छात्र आवास केंद्र रहा है, माननीय प्रधानमंत्री जी ने इसे लघु काशी कहा है ,लोकप्रिय सांसद लोकसभाध्यक्ष माननीय श्री ओम बिरला जी भी लगातार कोटा के सर्वांगीण विकास हेतु प्रयत्नशील है ,इसलिए आवश्यकता है कोटा शहर जहाँ बड़ी संख्या में छात्र इंजीयरिंग ,मेडिकल समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं ,ऐसे में शहर के कुछ प्रमुख क्षेत्र जहाँ छात्रों की भीड़, हॉस्टल और कोचिंग सेंटर अधिक रहती है ,और ये वही इलाके हैं

जहाँ मुख्य मार्ग, भीड़भाड़ और शहरी सुरक्षा निरीक्षण सबसे ज़्यादा ज़रूरी है जिनमें राजीव गांधी नगर, महावीर नगर, विज्ञान नगर, तलवंडी, कुन्हाड़ी और जवाहर नगर, जहाँ कोचिंग संस्थान व हॉस्टल बड़ी संख्या में स्थित हैं,ये सभी क्षेत्र मुख्य मार्गों और चौराहों से जुड़े हुए हैं, इनमें से कुछ रेटेड और पंजीकृत हैं, जबकि कई छोटे/निजी हॉस्टल भी हैं जिनका अनुचित निर्माण, लापरवाही या निरीक्षण का अभाव हो सकता है,यही कारण है कि शहरी सुरक्षा व भवन निरीक्षण नीति के तहत इन्हें भी शामिल किया जाना चाहिए। इसलिए यहाँ भवन सुरक्षा और नियमित निरीक्षण की आवश्यकता सबसे अधिक है।अब आवश्यकता है त्वरित नीति-एक्शन की।मुख्यमंत्री और शहरी विकास विभाग को चाहिए कि कोटा सहित पूरे राजस्थान में छात्र आवास, हॉस्टल और मुख्य सड़कों पर स्थित इमारतों का अनिवार्य संरचनात्मक ऑडिट कराएँ, दोषियों की जवाबदेही तय करें और भवन-सुरक्षा को विकास नीति का केंद्र बनाएं।नीति में सख़्ती, क्रियान्वयन में गति और निगरानी में पारदर्शिता,यही भविष्य की सुरक्षा की कुंजी है।
डॉ गांधी ने एक युवा बाल कोचिंग छात्र की मौत सुनकर ,क्योंकि है हर जान महत्वपूर्ण ,भविष्य में न हो ऐसी घटना …
अश्रुपूरित होकर लिखा
📩माननीय मुख्यमंत्री को भेजा पॉलिसी ड्राफ्ट ईमेल
……
माननीय मुख्यमंत्री जी,
राजस्थान सरकार
जयपुर
विषय : कोटा में हालिया तीन मंजिला इमारत दुर्घटना के संदर्भ में अवैध निर्माण पर कार्रवाई एवं राज्यव्यापी निरीक्षण हेतु निवेदन
(Policy Note संलग्न)
“कोटा निर्माण हादसा : राजस्थान में निर्माण सुरक्षा एवं शहरी नियमन सुदृढ़ीकरण” विषय पर एक संक्षिप्त Policy Note तैयार किया है, जिसे इस ई-मेल के साथ संलग्न किया जा रहा है। इसमें अवैध निर्माण रोकने, निरीक्षण प्रणाली सुदृढ़ करने तथा जवाबदेही तय करने से संबंधित ठोस नीति सुझाव शामिल हैं।
नीति-संदर्भ से ध्यान देने योग्य बिंदु
✔️ छात्र-भीड़ वाले क्षेत्रों में स्थित बहुमंज़िला आवासीय/निजी भवनों को हाई-रिस्क कैटेगरी में चिन्हित किया जाए
✔️ मुख्य मार्गों, चौराहों व सार्वजनिक स्थलों पर स्थित इमारतों का अनिवार्य संरचनात्मक एवं गुणवत्ता ऑडिट कराया जाए
✔️ नगर निगम की अनुमति के बिना बने या निर्माणाधीन भवनों पर तत्काल कार्यवाही और निर्माण रोक सुनिश्चित हो
✔️ तीन मंज़िल या अधिक सभी भवनों के लिए तृतीय-पक्ष तकनीकी जाँच अनिवार्य की जाए
✔️ हॉस्टल, पीजी और छात्र आवास भवनों के लिए अलग भवन-सुरक्षा मानक (Student Housing Safety Code) लागू हों
✔️ निरीक्षण प्रक्रिया को समयबद्ध, दस्तावेज़-आधारित और सार्वजनिक रूप से पारदर्शी बनाया जाए
✔️ लापरवाही की स्थिति में भवन मालिक, ठेकेदार, अभियंता और संबंधित अधिकारी की संयुक्त जवाबदेही तय हो
✔️ नगर निगम स्तर पर डिजिटल बिल्डिंग रजिस्टर और निरीक्षण ट्रैकिंग सिस्टम विकसित किया जाए
✔️ मुख्यमंत्री स्तर से राज्यव्यापी विशेष निरीक्षण अभियान चलाकर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएँ
✔️ शहरी विकास नीति में जन-सुरक्षा को विकास से ऊपर प्राथमिकता के रूप में स्थापित किया जाए
कोटा में छात्रों की सर्वाधिक भीड़ वाले प्रमुख क्षेत्र हैं राजीव गांधी नगर, महावीर नगर, विज्ञान नगर, तलवंडी, कुन्हाड़ी और जवाहर नगर, जहाँ कोचिंग संस्थान व हॉस्टल बड़ी संख्या में स्थित हैं।ये सभी क्षेत्र मुख्य मार्गों और चौराहों से जुड़े हुए हैं, इसलिए यहाँ भवन सुरक्षा और नियमित निरीक्षण की आवश्यकता सबसे अधिक है।
कोटा जैसे छात्र-प्रधान शहर में, जहाँ राजीव गांधी नगर, महावीर नगर, विज्ञान नगर, तलवंडी और कुन्हाड़ी जैसे क्षेत्रों में हज़ारों छात्र मुख्य सड़कों और चौराहों के आसपास रहते हैं, वहाँ भवन सुरक्षा केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं हो सकती। अवैध या अनियमित तीन-चार मंज़िला इमारतों का बिना संरचनात्मक ऑडिट के खड़ा होना, सार्वजनिक सुरक्षा के लिए स्थायी खतरा बन चुका है। दुर्भाग्य यह है कि शहरी निकायों की कार्रवाई अक्सर हादसे के बाद सक्रिय होती है, जबकि नीति का उद्देश्य दुर्घटना-पूर्व रोकथाम होना चाहिए।
अब आवश्यकता है कि माननीय मुख्यमंत्री महोदय आपके स्तर पर इस घटना को एक राज्य-स्तरीय त्वरित एक्शन के रूप में लिया जाए। कोटा तक सीमित कार्यवाही पर्याप्त नहीं होगी। पूरे राजस्थान में मुख्य मार्गों, भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों और छात्र आवास क्षेत्रों में स्थित भवनों का नियमित, समयबद्ध और दस्तावेज़-आधारित गुणवत्ता निरीक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए। साथ ही, यह भी आवश्यक है कि केवल भवन मालिक या ठेकेदार ही नहीं, बल्कि अनुमति देने, निरीक्षण करने और निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों की भी स्पष्ट जवाबदेही तय हो।शहरी विकास का अर्थ केवल ऊँची इमारतें और तेज़ निर्माण नहीं होता। यदि विकास सुरक्षित नहीं है, तो वह भविष्य के लिए बोझ बन जाता है। कोटा का हादसा यह स्पष्ट संदेश देता है कि अब शहरी नीति को पुनः परिभाषित करने का समय आ गया है,जहाँ सुरक्षा, गुणवत्ता और जवाबदेही विकास के केंद्र में हों। यदि आज सख़्त और त्वरित नीतिगत निर्णय लिए गए, तो यह त्रासदी एक निर्णायक मोड़ बन सकती है।
मेरा विनम्र निवेदन है कि इस Policy Note पर शहरी विकास एवं आवास विभाग के स्तर पर गंभीरतापूर्वक विचार कर आवश्यक निर्देश जारी किए जाएँ, ताकि राजस्थान में शहरी विकास सुरक्षित, अनुशासित एवं नागरिक जीवन की सुरक्षा पर केंद्रित बन सके।
आपके नेतृत्व में नागरिकों को सुरक्षा और सुशासन की पूर्ण अपेक्षा है। आशा है कि इस विषय में आवश्यक निर्णय लेकर उदाहरण प्रस्तुत किया जाएगा।


डॉ. नयन प्रकाश गांधी , भारत सरकार के अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान मुंबई से अर्बन रीजनल प्लानिंग में प्रशिक्षित एलुमनाई रहे है ,विभिन्न सरकारी ,गैर सरकारी प्रोजेक्ट में कंसलटेंट रह चुके है ,वे भारत के सबसे युवा लोक नीति विशेषज्ञ है एवं उच्च स्तरीय प्रोजेक्ट इंस्पेक्शन, मॉनिटरिंग इवेल्यूएशन , कैपेसिटी बिल्डिंग एवं सीएस आर,सोशल इंजीनियरिंग के एक्सपर्ट है ।




