Tuesday, September 8, 2026
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यहां राम जन्म की खुशी में फूंकते हैं रावण

राजस्थान के हाडौती में चैत मास की दसवीं पर रावण दहन करने की अलग परंपरा रही है, इसे लोक  उत्सव का रूप दिया जाता है जिसमें पूरे 10 दिनों तक रामलीला, रासलीला, भजन संध्या, जागरण श्री राम का वचन से लेकर झांकिया सजाने का दौर चलता है, कहीं जगह आंचलिक से लेकर राजस्थानी भाषाई स्तर और भारतीय स्तर के कवि सम्मेलनों का आयोजन भी होता है, हाडौती के झालावाड़ शहर, इटावा समेत करीब 14 स्थानॊं पर यह उत्सव मनाया जाता हैं, हाडौती के इतिहासकारों के अनुसार आंचल में चैत मास नवरात्र में रावण दहन की परंपरा रियासत काल से चली आ रही है, कोटा के महाराज उम्मेंद सिंह द्वितीय और महाराव भीम सिंह के शासनकाल में भी गांव और कस्बॊ में यह परंपरा चल रही है, इसके कारण का कोई लिखित प्रमाण नहीं मिला, झालावाड़ के इतिहास का ललित शर्मा के अनुसार बाल्मीकि रामायण में चौपाई चैत सुदी चौदस जब आई, मरो दशानन, जग दुखदाई, जबकि हम विजयदशमी को रावण पर भगवान श्री राम की जीत का पर्व मनाते हैं, रामायण में चौदस भी लिखा है, तो उसके नीचे थी कोई अर्थ होंगे यह शोध का विषय है

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