शहर से 50 किलोमीटर दूरी पर दरा नाल में हो रहे जाम से लोगों को शीघ्र राहत पहुंचाने का मामला न्यायालय में पहुंच गया। इस मांग को पूरा करवाने को लेकर तीन व्यक्तियों ने जनहित याचिका स्थाई लोक अदालत में जनहित याचिका पेश की है।लोक अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना निदेशक, जिला कलेक्टर, कोटा ग्रामीण एसपी एवं कोटा पश्चिम मध्य रेलवे कोटा के मंडल रेल प्रबंधक को नोटिस जारी किए। इस पर उनत्ते जवाब तलब कर सुनवाई के लिए 24 फरवरी की पेशी है।वकील लोकेश कुमार सैनी. पत्रकार जगदीश अरविंद एवं स्वतंत्र पत्रकार धर्म बंधु आर्य ने अपनी याचिका में बताया कि बजट घोषणा के बाद भी नेशनल हाईवे 52 पर कोटा झालावाड़ के बीच दरा घाटी में एक और रेलवे अडर ब्रिज बनाने का कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है। जबकि इसके लिए 16 करोड रुपए का बजट भी मंजूर हो चुका है। उन्होंने बताया कि दरा नाल में पल-पल में लगने वाला जाग जानलेवा साबित हो रहा है। लोग परेशान है। दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस से सफर प्रारंभ होने के बाद यातायात का दबाव बढ़ चुका है। इस कारण जाम को समस्या और गंभीर हो चुकी है। उन्होंने आगे अपनी याचिका में बताया कि 9 फरवरी को जाम में एंबुलेंस फंसने रो एक गरीज की अकाल गौत हो चुकी है। इस कारण दरा घाटी में जाम से निजात दिलाया जाना जनहित में अति आवश्यक हो गया है। भटवाड़ा राड़क गार्ग को ठीक करने का इरापर से एक्सप्रेस-वे के यातायात को निकालना अति आवश्यक है। इससे दरा नाल से गुजरने वाले यातायात में कुछ कमी अवश्य आएगी। पुरानो पुलिया के वैकल्पिक मार्ग को खोल जाना आवश्यक है जिसमें छोटे एवं हल्के वाहनों की आवाजाही सुगमता रो होगी आगजन को राहत गिलेगी ।
प्रयागराज, दिल्ली एवं अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों को सीमलिया, बाच, झालावाड़, एमपी मार्ग से डायवर्ट भी किया जाना आवश्यक है।






