Saturday, April 18, 2026
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कोटा के समाजसेवी व वैज्ञानिक डॉ. राकेश चन्द्र अग्रवाल को गौमूत्र आधारित उत्पाद, संजीवनी रस’ के लिए ‘भारत गौरव पुरस्कार” से सम्मानित

कोटा, । कोटा के समाजसेवी व वैज्ञानिक डॉ. राकेश चन्द्र अग्रवाल को गौमूत्र आधारित उत्पाद, संजीवनी रस’ के लिए ‘भारत गौरव पुरस्कार” से सम्मानित किया गया है।

कार्बनिक रसायन विज्ञान में आईआईटी बॉम्बे के प्रसिद्ध • विद्वान में राकेश चंद्र अग्रवाल, कोटा राजस्थान के रहने वाले हैं। उन्हें हैदराबाद के पास गुलबर्गा / कालबुर्गी में एक प्रतिष्ठित संगठन, ‘भारत विकास संगम द्वारा आयोजित ‘भारतीय संस्कृति उत्सव में उनके अभूतपूर्व नवाचार के लिए सम्मानित किया गया है। सजीवनी रस गोवश के मूत्र से तैयार किया गया संरक्षित, सुगंधित, स्वादिष्ट पेय है।

 

डॉ. राकेश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि भारतीय संस्कृति में कुछ औषधियों विरासत से चली आ रही है। जैसे हल्दी, नीम तुलसी अजवायन, दालचीनी आदि इसी तरह गोमूत्र भी पुरातन समय से औषधि रूप में रोगोपचार में उपयोग होता आया है। आज भी अनेक असाध्य रोगों का ■ उपचार इस आयुर्वेदिक पद्दति से हो रहा है। परन्तु गोमूत्र शीघ्र सड़ने और दुर्गंध युक्त होने से इसका व्यापक • उपयोग बाधित हो जाता है। इस समस्या का समाधान डॉ. राकेश – अग्रवाल ने सजीवनी रस, यानि बिना

उन्होंने बताया कि 3 साल तक करीबन 300 से अधिक सैंपल अजमाने के बाद उन्होंने यह फार्मूला तैयार किया है। कोटा यूनिवर्सिटी की माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट की विभाग अध्यक्षा डॉ. पल्लवी शर्मा द्वारा इस उत्पाद को सही प्रमाणित करते हुए इस पर आधारित कई रिसर्च प्रकाशित किए गए हैं।

अब डॉ अग्रवाल देश की अनेक गौशालों को इसका निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे है। जिसके आधार पर यह उत्पाद देश के कोने कोने में बिक रहा है और गौशालाओं की आर्थिक स्थिति को सम्बल मिला है।

दूसरी ओर सजीवनी रस जिसमें 96% गोमूत्र ही है। इससे लोगों को जटिल बीमारियों में जैसे टीबी, कैंसर, डेंगू आदि सभी में फायदा हो रहा है। यह अच देश के सभी भागों में आसानी से उपलब्ध हो रहा है। इसके विस्तृत सामाजिक उपयोगिता को देखते हुए प्रतिष्ठित सामाजिक संगठन गोविदाचार्य द्वारा स्थापित, भारत विकास संगम द्वारा उनके 7 वें त्रैवार्षिक विशाल आयोजन में डॉ राकेश चंद्र अग्रवाल को भारत गौरव सन्मान पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इत्त सात दिवसीय भारतीय संस्कृति उत्सव पर कई प्रसिद्ध हस्तियां और संत उपस्थित थे। साथ ही, पूरे भारत से लगभग 25 लाख लोग इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

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