कोटा शैली कलम में साकार हुई माँ महागौरी की दिव्य छवि, श्वेत आभा और पवित्रता का अद्भुत संगम
चित्रकार शंभू सिंह चौबदार✍️
कोटा। भारतीय चित्रकला की समृद्ध परंपरा को दर्शाती कोटा शैली कलम में माँ महागौरी की मनमोहक पेंटिंग तैयार की गई है। पत्थरों से बने प्राकृतिक रंगों और स्वर्णकारी के पारंपरिक शिल्प के माध्यम से माँ के दिव्य स्वरूप को चित्रित किया गया है। यह कलाकृति न केवल धार्मिक आस्था को अभिव्यक्त करती है, बल्कि हाड़ौती की पारंपरिक चित्रकला की बारीकियों और कलात्मक विरासत को भी सामने लाती है।
नवरात्रि के आठवें दिन माँ दुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ महागौरी शांति, पवित्रता, करुणा और कठोर तपस्या की प्रतीक हैं। उनका स्वरूप अत्यंत उज्ज्वल, शांत और मन को शीतलता प्रदान करने वाला माना जाता है।
पौराणिक कथा में वर्णित है माँ महागौरी का दिव्य स्वरूप
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। लंबे समय तक तपस्या करने के कारण उनका शरीर धूल और तप के प्रभाव से श्याम वर्ण का हो गया था। माता की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने गंगाजल से उन्हें स्नान कराया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत गौर वर्ण का हो गया। इसी दिव्य स्वरूप के कारण वे माँ महागौरी के नाम से विख्यात हुईं।
माँ महागौरी को सामान्यतः चार भुजाओं वाली देवी के रूप में दर्शाया जाता है। वे वृषभ पर सवार होती हैं और उनके हाथों में त्रिशूल तथा डमरू जैसे आयुध दिखाई देते हैं। उनका श्वेत वस्त्र और उज्ज्वल आभा पवित्रता, शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।
कोटा शैली की कलात्मक विशेषताओं से सजी पेंटिंग
कोटा शैली की पारंपरिक कलम में तैयार माँ महागौरी की यह पेंटिंग धार्मिक विषयवस्तु और सूक्ष्म कलात्मक अभिव्यक्ति का सुंदर उदाहरण है। प्राकृतिक पत्थर के रंगों के साथ स्वर्णकारी का प्रयोग चित्र को विशिष्ट आकर्षण प्रदान करता है। बारीक रेखांकन, रंगों का संतुलन और पारंपरिक चित्रांकन की तकनीक देवी के स्वरूप को जीवंत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ महागौरी की यह कलाकृति श्रद्धालुओं को भक्ति, शांति और पवित्रता का संदेश देती है। साथ ही, यह कोटा शैली की पारंपरिक चित्रकला को नई पीढ़ी तक पहुँचाने और हाड़ौती की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।





