✍️ डॉ. नयन प्रकाश गाँधी
इंटरनेशनल एनएलपी लाइफ एवं करियर कोच
नवरात्रि केवल देवी उपासना, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं है, बल्कि यह स्वयं को भीतर से मजबूत बनाने, मन को अनुशासित करने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का भी अवसर है। भारतीय संस्कृति में शक्ति की आराधना का विशेष महत्व है। ऐसे में गायत्री मंत्र की साधना व्यक्ति को आत्मचिंतन, मानसिक स्थिरता और नियमित जीवनशैली की दिशा में प्रेरित कर सकती है।आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में विद्यार्थी, युवा और कामकाजी लोग पढ़ाई, करियर, पारिवारिक जिम्मेदारियों तथा भविष्य की चिंता से जूझ रहे हैं। तनाव, अनियमित दिनचर्या, नींद की कमी और एकाग्रता का अभाव उनकी कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं। ऐसे समय में नवरात्रि के दौरान नियमित मंत्र जप, ध्यान, संयमित दिनचर्या और सकारात्मक चिंतन को अपनाना उपयोगी अभ्यास बन सकता है।
गायत्री मंत्र और मानसिक सशक्तीकरण
“ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥”
गायत्री मंत्र में सद्बुद्धि, विवेक और सही दिशा में प्रेरित होने की प्रार्थना निहित है। श्रद्धापूर्वक मंत्र जप करते समय व्यक्ति अपने विचारों को एकाग्र करने और मन को अनावश्यक भटकाव से दूर रखने का अभ्यास करता है। नियमित ध्यान और शांत भाव से मंत्रोच्चार तनाव प्रबंधन तथा भावनात्मक संतुलन में सहायक हो सकते हैं। हालांकि, इसके परिणाम व्यक्ति की परिस्थिति और अभ्यास पर निर्भर करते हैं। नवरात्रि में अगर आप चाहे तो 24000 गायत्री मंत्र का लघु अनुष्ठान भी सम्पादित कर सकते है। विद्यार्थी अगर नियमित गायत्री मंत्र साधना ब्रह्मुरहुत में करे और संयमित जीवन शैली के साथ अध्ययन करे तो शारीरिक बल में वृद्धि के साथ मानसिक बुद्धि स्थिर करने में अत्यंत उपयोगी हो सकता है। गायत्री मंत्र ब्रह्मांड में सबसे सरल मंत्र है शुरुवात में कोई भी विद्यार्थी चौबीस गायत्री मंत्र से शुरुवात कर सकता है धीरे धीरे एक माला प्रतिदिन करे तो ज्ञानार्जन मन मस्तिष्क की बुद्धि में वृद्धि स्वत: तीव्र होती है और इच्छित सफलता के लिए निरंतर अनुशासन के साथ इंद्रियों को नियंत्रित कर बुद्धि जागृत होती है।इसी प्रकार व्यक्तिगत रूप से परिवार में सुख समृद्धि हेतु नवरात्रि में गायत्री मंत्र साधना का विशेष महत्व है ,आजकल व्यस्ततम शेड्यूल की वजह से शारीरिक व्याधियां घर कर गई है ,आज हर कोई दूसरा तीसरा वरिष्ठ व्यक्ति बीपी असंतुलन ,डायबिटीज ,हार्ट का मरीज बनता जा रहा है ,कई मानसिक व्याधियों में फंस जाते है ,कई पारिवारिक कलह आदि के कारण स्वयं को मनोविकार से ग्रसित कर लेते है ,इन सभी से मुक्ति पानी है और शांतचित्त रहकर जीवन में शारीरिक रूप से संयमित बनना है ,स्व अनुशासन ,आत्मनियंत्रण ,आत्मबल ,आत्मानुशासन ,आत्मकेंद्रित ,आत्मावलोकन की स्थिति में गायत्री मंत्र साधना साधक के आलस्य पूर्ण ,मनोविकार ,परिवर्तनकारी सोच को केंद्रित कर स्थिर चित्त में प्रवेश करवाती है इससे वैज्ञानिक रूप से पूरे शरीर में एक सूर्यमंडल की आभा ,जीवन में चहूँ और सकारात्मक आवरण आच्छादित हो जात है ,में आश्वस्त करता हु आप नियमित केवल चौबीस गायत्री मंत्र पूरे विधि विधान से संकल्प लेकर एक वर्ष तक करे शायद चौबीस गायत्री मंत्र में लगने वाला शुरुवाती दस मिनट आपके सम्पूर्ण मानवीय जीवन की पराकाष्ठा को वैचारिक रूप से मानसिक ,शारीरिक रूप से न बदल दे तो बताइयेगा ।आइए संकल्प ले इस नवरात्रि में छोटा सा की नियमित गायत्री मंत्र साधना करे।
शक्ति उपासना से व्यक्तित्व निर्माण तक
नवरात्रि का वास्तविक संदेश केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों को बेहतर बनाना भी है। गायत्री मंत्र साधना को नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, सकारात्मक चिंतन और अनुशासित दिनचर्या के साथ जोड़कर व्यक्ति आत्मविकास की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।
आइए, इस नवरात्रि संकल्प लें कि हम अपने मन को विवेकशील, शरीर को स्वस्थ और अपने आचरण को श्रेष्ठ बनाने का निरंतर प्रयास करेंगे। क्योंकि सच्ची शक्ति वही है, जो व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में धैर्यवान, निर्णयों में विवेकशील और कर्मों में जिम्मेदार बनाए। यही साधना का सार है और यही एक स्वस्थ, सशक्त युवा तथा समर्थ समाज के निर्माण की आधारशिला भी है।






